प्रेम पर कवितावां

प्रेम जूण जीवण रौ आधार

है। राजस्थानी प्रेमाख्यान अर पूरी साहित्यिक जातरा में इणरा फूठरा अर सिणगार्‌योड़ा दाखला आपां पढ़ां‌‌‌‌। अठै संकलित रचनावां प्रेम विसै रै ओळै-दोळै रचियोड़ी है‌।

कविता526

प्रेम री परिभाषा

सत्येंद्र चारण

प्रीत मंडाण

सुरेश कुमार डूडी

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

प्रभात

पृथ्वीराज राठौड़

थे कत्ली हो

राजूराम बिजारणियां

धरती काती प्रीत

राजूराम बिजारणियां

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

म्हारौ पियारो पीव

रामाराम चौधरी

मायड़ भासा

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

कठा सूं आवै है सबद

भगवती लाल व्यास

प्रग्या

चन्द्र प्रकाश देवल

हेत प्रेम अपणायत में

श्रवण दान शून्य

याद

विजय राही

म्हैं आवूंला जरूर

गोरधन सिंह शेखावत

आभै उतरी प्रीत

राजूराम बिजारणियां

खेजड़ी अर तूं

आशाराम भार्गव

सींव रा समाचार

राजूराम बिजारणियां

वो झुरै

अर्जुनदेव चारण

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

प्रीत

चन्द्र प्रकाश देवल

प्रीत, छांट अर गड़ा

राजूराम बिजारणियां

म्हारै पुराणियां घर री

मृदुला राजपुरोहित

गळगी- हेत

राजूराम बिजारणियां

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

इण तरै रा सून्याड़ में

भगवती लाल व्यास

मंगती कोनी

देवीलाल महिया

भैण-भाई

यतीन्द्र पूनियां

खेत-स्क्रैप

मोनिका गौड़

घरे आजा

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

पीव बैठा परदेस

रामाराम चौधरी

मायड़

महेंद्रसिंह छायण

चांनणी रात

रेवतदान चारण कल्पित

प्रेम

तेजस मुंगेरिया

धरती चुगगी

राजूराम बिजारणियां

सतिये नै सीख

सत्येंद्र चारण

म्हारी दीठ

अर्जुनदेव चारण

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

म्हारो हुवणो

रामकुमार भाम्भू

संझ्या : तीन चतराम

प्रेमजी ‘प्रेम’

रातरांणी

मणि मधुकर

राज आवौ सा!

नैनमल जैन

असल पिछाण

आनंद पुरोहित 'मस्ताना'

म्हारा मीत..!

महेंद्रसिंह छायण

राजस्थान

मान कँवर ‘मैना’

देश आपणो

विजयलक्ष्मी देथा