हियौ पर कवितावां

कवियों-शाइरों के घर

दिल या हृदय एक प्रिय शब्द की तरह विचरता है, जहाँ दिल की बातें और दिल के बारे में बातें उनकी कविताई में दर्ज होती रहती हैं। यह चयन दिल पर ज़ोर रखती ऐसी ही कविताओं में से किया गया है।

कविता102

वो झुरै

अर्जुनदेव चारण

पगडांडियां

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

अंतस रो दीवो

सुमन बिस्सा

करमगत

गजेसिंह राजपुरोहित

अंतै धैजो धार

महेंद्रसिंह छायण

ठूंठ

गजेसिंह राजपुरोहित

उजास रै आंगणै

रतन ‘राहगीर’

कांई म्हांका दिल में

हीरालाल शास्त्री

भाव, आखर अर कविता

महेन्द्र मील

मन री बातां

मेघराज मुकुल

म्है हेरूं, थूं हेरै

श्याम गोइन्का

थूं अणबोल्यो छानै सै

पवन राजपुरोहित

हथेळी में चांद

मोनिका गौड़

पण है सबद

अनातोली साफ्रोनोव

मोबाइल

घनश्याम नाथ कच्छावा

चालणी

हरीश बी. शर्मा

मन-सूवटियो

रामनाथ व्यास ‘परिकर’

हिये रे आळे-याळे

शंकरलाल मीणा

जिंदगी

करुणा दसोरा

अंतस

अमोलकचन्द जांगिड़

जोत

रतन ‘राहगीर’

मानवता

भवानीसिंह राठौड़ 'भावुक’

आंख्यां री आभा

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

अंतस रो प्रश्न

शिव 'मृदुल'

अंतस री हूंस

इरशाद अज़ीज़

बुध घणी बळवान

भारती कविया

कांई मांडू?

अतुल कनक

मिनख

सुरजीतसिंह भारतीय

आपां री प्रीत

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

प्रतिग्या

सुखेन्दु मोहन दास

पीळा पात

हुसैनी वोहरा

मत मारो मन नै

आनंद पुरोहित 'मस्ताना'

आभै रो आभार

राजेश कुमार व्यास

मन

वाज़िद हसन काजी

गत

विनोद सोमानी 'हंस'

थारै खेत रो टीबो

सीमा राठौड़ ‘शैलजा’

मन

सीमा भाटी

पीड़ काळज्यै री

प्रहलादराय पारीक

मन की गांठ्यां खोल

प्रीतिमा ‘पुलक’

बंसरी अर मुगट

लक्ष्मीनारायण रंगा

ऊंडै आभै गूंजती

मालचंद तिवाड़ी

थारो प्रेम

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

सवार

मालचंद तिवाड़ी

रचूं कविता

शंकरसिंह राजपुरोहित

पोथी रा पानां

दीपचन्द सुथार

ऊंडी-दीठ

अस्त अली खां मलकांण