हियौ पर दूहा

कवियों-शाइरों के घर

दिल या हृदय एक प्रिय शब्द की तरह विचरता है, जहाँ दिल की बातें और दिल के बारे में बातें उनकी कविताई में दर्ज होती रहती हैं। यह चयन दिल पर ज़ोर रखती ऐसी ही कविताओं में से किया गया है।

दूहा14

अति सुंदर सोहइ आकार

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

नयण मिलंतां मन मिले

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

कथूं हियै रा भाव

नरपत आशिया "वैतालिक"

अवरहिं गति मति पिण अवर

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

नयण पदारथ नयन रस

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

सावण सांझ सुहावणी (बादळी)

चंद्र सिंह बिरकाळी

नयण-बांण नारी तणे

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

बैठ भलाई डागळै

भागीरथसिंह भाग्य