हियौ पर ग़ज़ल

कवियों-शाइरों के घर

दिल या हृदय एक प्रिय शब्द की तरह विचरता है, जहाँ दिल की बातें और दिल के बारे में बातें उनकी कविताई में दर्ज होती रहती हैं। यह चयन दिल पर ज़ोर रखती ऐसी ही कविताओं में से किया गया है।

ग़ज़ल7

फूल मन रा खिल जावै

अब्दुल समद ‘राही’

सबदां री शमशीर परखजै

रतन सिंह चांपावत

अब हिवड़ै रा पट खोलो सा

रतन सिंह चांपावत

कठै-कठै

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

थां सूं लूंठी आस धणी!

राजेंद्र स्वर्णकार

बण-ठण संवर नै देख

अब्दुल समद ‘राही’