महिमा पर कवितावां

मैमा महानता की अवस्था

या भाव है। महिमा की गिनती आठ प्रकार की सिद्धियों में से एक के रूप में भी की गई है। इस चयन में शामिल काव्य-रूपों में ‘महिमा’ कुंजी-शब्द के रूप में उपस्थित है।

कविता121

आ राजस्थानी भाषा है

शक्तिदान कविया

मरू ओळखाण

सुरेश कुमार डूडी

म्हारौ राजस्थान

रामाराम चौधरी

राणी पदमणी

मेघराज मुकुल

मून मारै चिरळाटी

आनंद पुरोहित 'मस्ताना'

ओ मंडाण साम्हीं है

मोहन मण्डेला

चाल म्हारा चरखा घर रर घर

भौमराज भंवीरू ‘मंगल’

देसड़लो

मदनगोपाल शर्मा

प्रेम

राजेन्द्र शर्मा 'मुसाफिर'

मां तो मां ई है

स्वामी खुसाल नाथ

अैनांण

आशीष पुरोहित

कैयां जाऊं भूल

महावीर जोशी

परकत इच्छा

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

अंधारै रो हिसाब

अर्जुन अरविन्द

राजस्थानी भासा

श्रीमाली श्रीवल्लभ घोष

जुग-जुग

मदनमोहन परिहार

म्हारा बछड़िया

कृष्णा आचार्य

मिनख मिनख री मार

कपिलदेव आर्य

धरती

भवानी शंकर व्यास ‘विनोद’

गांव की गोरी

शिवचरण सेन ‘शिवा’

जै लिखण वाळो हुवै

रतन ‘राहगीर’

मिनख री जात

सवाई सिंह शेखावत

आजादी री डोर

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

नादाधींन जगत

राजेश कुमार व्यास

राजस्थान

सत्येन जोशी

म्हारा कंवर सा

कल्याणसिंह राजावत

अस्यौ छै म्हांको गांव

दिलीप सिंह ‘हरप्रीत’

ओ जमारो

हरि प्रसाद पारीक

घूंघट

रावत सारस्वत

रसोई

कमल किशोर पिपलवा

आ धरती उजळा धोरां री

श्रीनिवास तिवाड़ी

इणसूं किणरी हुवै नीं होड

अस्त अली खां मलकांण

सौ सुनार री

कैलाश मंडेला

कोटो टोकियो हो ग्यो

दिलीप सिंह ‘हरप्रीत’

गमियोड़ौ गांव

सत्यदेव संवितेन्द्र

हँस वाहिणी

ज्ञान भारती

देस री जवानी

मेघराज मुकुल

सिंवरण

सीमा पारीक

पाणी री दास्तां

प्रदीप शर्मा ‘दीप’

म्हे गीतां का बिणजारा

बनवारीलाल मिश्र ‘सुमन’