महिमा पर कवितावां

मैमा महानता की अवस्था

या भाव है। महिमा की गिनती आठ प्रकार की सिद्धियों में से एक के रूप में भी की गई है। इस चयन में शामिल काव्य-रूपों में ‘महिमा’ कुंजी-शब्द के रूप में उपस्थित है।

कविता93

आ राजस्थानी भाषा है

शक्तिदान कविया

मरू ओळखाण

सुरेश कुमार डूडी

म्हारौ राजस्थान

रामाराम चौधरी

अेक कहाणी

राकेश कमल मूथा

प्रीत रै आंगणै

बंशी यथार्थ

दीठ

अर्जुनसिंह शेखावत

सुख अर सिंवाळ

बाबूलाल शर्मा

दोजक

बंशी यथार्थ

मून मारै चिरळाटी

आनंद पुरोहित 'मस्ताना'

ओ मंडाण साम्हीं है

मोहन मण्डेला

चाल म्हारा चरखा घर रर घर

भौमराज भंवीरू ‘मंगल’

देसड़लो

मदनगोपाल शर्मा

प्रेम

राजेन्द्र शर्मा 'मुसाफिर'

अैनांण

आशीष पुरोहित

राणी पदमणी

मेघराज मुकुल

धरती रो हेलो

मेघराज मुकुल

ईक सूरज पूरब मा उग्यो

प्रियंका भट्ट

तसवीर नी बोले

कैलाश मंडेला

म्हारो मरुधर देश...

श्रीनिवास तिवाड़ी

लूण रो खार

मीठालाल खत्री

नाडी रो जळ

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

मरुधर महिमा

कृष्णपाल सिंह राखी

काळ बहेलियो

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

दिव्य-दीठ

गंगादास

भोळं नो भगवान

राम पंचाल भारतीय

हेली

ताऊ शेखावटी

भड़ाका नो भबकारो

ज्योतिपुंज

बिस्वास

कृष्ण कुमार स्वामी

देश आपणो

विजयलक्ष्मी देथा

कोरजाक

ब्रज नारायण कौशिक

कसमूल आरती

सुमन बिस्सा

लुगायां

कमल किशोर पिपलवा

कळां भखै मिनखपणों

इन्द्रा व्यास

परभाती

कल्याणसिंह राजावत

किराया को मकान छ

वल्लभ महाजन

ऊंडी-दीठ

अस्त अली खां मलकांण

काबां वाळी किनयाणी

पवन कुमार राजपुरोहित

मुरधर रा हीरा

अस्त अली खां मलकांण

वीणा धरणी मायड़ म्हारी

कालूराम प्रजापति 'कमल'

इतियास

अलेक्सेई सुर्कोव

कांमेतण

चन्द्र प्रकाश देवल

तूं लागै घणी रूपाळी

छैलूदान चारण 'छैल'