महिमा पर ग़ज़ल

मैमा महानता की अवस्था

या भाव है। महिमा की गिनती आठ प्रकार की सिद्धियों में से एक के रूप में भी की गई है। इस चयन में शामिल काव्य-रूपों में ‘महिमा’ कुंजी-शब्द के रूप में उपस्थित है।

ग़ज़ल4

राखोड़ो व्हे जाई जी

पुष्कर 'गुप्तेश्वर'

करमां में रेख क्यूं

लालदास 'राकेश'

तिणकलै री ई जो इतरी छिंयां है

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

गेशू-गेशू, जुल्फां-जुल्फां

प्रदीप शर्मा ‘दीप’