किसान पर कवितावां

किसान सबद रा अलेखूं

सरूप है। खेतिहर या पछै जमीं बावणियौ किसान अलग व्है, जकै कनै आपरी जमीं व्है वा किसान अलग। पण अठै संकलित रचनावां फगत लोक मुजब 'जमींदार' सबद नै छोड़'र किसान सबद रै सगळां सरुपां नै पूरा करै।

कविता110

स्वाद

आईदान सिंह भाटी

मार्क्स

शिव बोधि

ढाणी

देवीलाल महिया

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

चेत मांनखा

रेवतदान चारण कल्पित

किरसौ

डालेश पारीक 'मतवाला'

काळ

रामस्वरूप किसान

म्हैं अन्नदाता कोनी

रामस्वरूप किसान

पींपळ

सतीश छिम्पा

पाछा चालो खेत में

विमला महरिया 'मौज'

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

करसाण

शिव 'मृदुल'

करसै री कसक

कानसिंह भाटी

खेत

संजू श्रीमाली

आषाढी बिरखा

नंदू राजस्थानी

किरसाण-जुवान

रतन ‘राहगीर’

बस्ती

मदन गोपाल लढ़ा

सिसर

नारायण सिंह भाटी

कुण जमीन रो धणी?

कन्हैयालाल सेठिया

बीघोड़ी

रेवतदान चारण कल्पित

भातो

गौरीशंकर निमिवाळ

माटी रा रंगरेज

रेवतदान चारण कल्पित

तपत अर किसान

बिशनाराम स्वामी

हरावळ में किरसांण कांमेती

रेवतदान चारण कल्पित

'अे' अर 'वे'

जबरनाथ पुरोहित

दस दात : 6. मतीरो

नानूराम संस्कर्ता

आंसू बैवावतो किसान

राजेन्द्र जोशी

नवीं जिन्दगी

गणपतिचन्द्र भंडारी

सीव अर पीड़

गौरीशंकर निमिवाळ

जतन

सुनील गज्जाणी

गांव

तेजस मुंगेरिया

रोटी अर म्हैं

शैलेन्द्र सिंह नूंदड़ा

फांदो

विनोद भट्ट

करसा

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

कुण देखै

ज्ञान भारती

बांध पगां में घूघरा

त्रिलोक शर्मा

ऊपरमाळ

मोहन पुरी

भरोसो

अनिल अबूझ

करसौ

पूजाश्री

निनाण

महावीर प्रसाद जोशी

कागद रै खेत

हनुमान प्रसाद 'बिरकाळी'

दस दात : 7. मोठ

नानूराम संस्कर्ता

दुखड़ो किसान रो

प्रभुदयाल मोठसरा

फरक

किशोर कुमार निर्वाण

कुण?

जयनारायण व्यास

कऊ

प्रमिला शंकर