देश पर कवितावां

देश और देश-प्रेम कवियों

का प्रिय विषय रहा है। स्वंतत्रता-संग्राम से लेकर देश के स्वतंत्र होने के बाद भी आज तक देश और गणतंत्र को विषय बनाती हुई कविताएँ रचने का सिलसिला जारी है।

कविता89

लोकतन्त्र-लोकतन्त्र

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

ओ कांई ढाळो है देस रो

सत्येंद्र चारण

रूंख अर देस

भंवर कसाना

देस री ओळूं मांय

मदन गोपाल लढ़ा

ओ मंडाण साम्हीं है

मोहन मण्डेला

देसड़लो

मदनगोपाल शर्मा

सबद चित्राम

अब्दुल वहीद कमल

संकल्प

श्रीमंत कुमार व्यास

स्याबास

गोरधन सिंह शेखावत

भोम-रुखाळा

सत्यनारायण इन्दौरिया

बेटी कै बहू?

कृष्ण कुमार स्वामी

डूंगरी न्हें बौली

भोगीलाल पाटीदार

फूलम-कथा

मणि मधुकर

मैंगाई

शिव शर्मा

विकास

वाज़िद हसन काजी

ओ म्हारो हिन्दुस्तान है

गणपत सिंह ‘मुग्धेश’

मन री पीड़ा मन में पाची

संतोष कुमार पारीक

सुतन्तर नागरिक

कमर मेवाड़ी

म्हारौ देस

रेवतदान चारण कल्पित

आज मचली जवानी

जगन्नाथ विश्व

तस्वीर रो आंसू

भानसिंह शेखावत ‘मरूधर’

देश आपणो

विजयलक्ष्मी देथा

बिखायती मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

आ है जिद्द म्हांरी

मुन्नीलाल गैपाळ

पांगळो तंत्र

मोनिका गौड़

सैनिक

विजय गिरि गोस्वामी 'काव्यदीप'

जद आजादी आंसू झारै

कान्ह महर्षि

बापू रौ चसमौ

चन्द्र प्रकाश देवल

कांई करां हजूर!

चन्द्र प्रकाश देवल

आज़ादी

पवन सिहाग 'अनाम'

गऊ पाळक देस

नमामीशंकर आचार्य

परदेश में

कुन्दन माली

माटी रा रंगरेज

रेवतदान चारण कल्पित

करां कांई

चन्द्र प्रकाश देवल

उठ ललकारो रे

कल्याणसिंह राजावत

ओ देस कठी'नैं जार्‌यो है

मानसिंह शेखावत ‘मऊ’

आतम-निरभर

शंकरसिंह राजपुरोहित

बीत्यै जुग री बात

हरीश भादानी

तिरंगा गीत

श्रीनिवास तिवाड़ी

देव करै धरती रखवाळी

अस्त अली खां मलकांण

वंदे मातरम्

लालचन्द मानव

भारत नैं संभाळां

गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

धरती रो रंगरेज

फतहलाल गुर्जर 'अनोखा'

आजादी

हरिलाल अग्रवाल