भगती काव्य पर संवैया

मध्यकाल में भक्ति आन्दोलन

की धारा में राजस्थान की शांत एवं सौम्य जलवायु में इस भू-भाग पर अनेक निर्गुणी एवं सगुणी संत-महात्माओं का आविर्भाव हुआ। इन उदारमना संतों ने ईश्वर भक्ति में एवं जन-सामान्य के कल्याणार्थ विपुल साहित्य की रचना यहाँ की लोक भाषा में की है। संत साहित्य अधिकांशतः पद्यमय ही है।

संवैया छंद23

मुझ बाळक पाळक

सुआसेवक कुलदीप चारण

जांगळ जाय जमी जद जोगण

सुआसेवक कुलदीप चारण

इंदर देह धरी इल ऊपर

सुआसेवक कुलदीप चारण

कव मेह घरां किनियौण

सुआसेवक कुलदीप चारण

सोरठ देश धरा बिच सोहत

सुआसेवक कुलदीप चारण

सिंह चढी भमती धर सेहर

सुआसेवक कुलदीप चारण

जगभान तुँहीं र जहान तुँहीं

सुआसेवक कुलदीप चारण

ईसर भाद्रेस प्रकास

ईसरदास बोगसा

सगती अवतारण चारण तारण

सुआसेवक कुलदीप चारण

करणी किनियौण सुआ सुभियौण

सुआसेवक कुलदीप चारण

असकाज धरे कर गाज

सुआसेवक कुलदीप चारण

किशनेस घरां जनमी कुँवरी

सुआसेवक कुलदीप चारण