भगती काव्य पर छंदां

मध्यकाल में भक्ति आन्दोलन

की धारा में राजस्थान की शांत एवं सौम्य जलवायु में इस भू-भाग पर अनेक निर्गुणी एवं सगुणी संत-महात्माओं का आविर्भाव हुआ। इन उदारमना संतों ने ईश्वर भक्ति में एवं जन-सामान्य के कल्याणार्थ विपुल साहित्य की रचना यहाँ की लोक भाषा में की है। संत साहित्य अधिकांशतः पद्यमय ही है।

छंद22

रुकमणी रै जोबन रो वरणाव

पृथ्वीराज राठौड़

कृष्ण-चरितर-वरणाव

सांयाजी झूला

रुकमणी रो हरण

सांयाजी झूला

जुद्ध वरणन

सांयाजी झूला

रुक्मणी रो जलम

सांयाजी झूला

रुकमणी री बाल्यावस्था

पृथ्वीराज राठौड़

जंभेसर जस

गिरधरदान रतनू दासोड़ी