भगती काव्य पर दूहा

मध्यकाल में भक्ति आन्दोलन

की धारा में राजस्थान की शांत एवं सौम्य जलवायु में इस भू-भाग पर अनेक निर्गुणी एवं सगुणी संत-महात्माओं का आविर्भाव हुआ। इन उदारमना संतों ने ईश्वर भक्ति में एवं जन-सामान्य के कल्याणार्थ विपुल साहित्य की रचना यहाँ की लोक भाषा में की है। संत साहित्य अधिकांशतः पद्यमय ही है।

दूहा83

दरिया संगत साध की

संत दरियाव जी

मेर रवाई मंडिआ

हरदास मीसण

विसनु नाम है सूर हम

ऊदोजी अड़ींग

रहनी करनी साध की

संत दरियाव जी

सब कोई चाहे मान कूं

स्वामी आत्माराम

सोही दुख एता सहै

चिमनजी कविया

दरिया दाई बाँझड़ी

संत दरियाव जी

तीन लोक चौदा भवन

संत दरियाव जी

दरिया संगत साध की

संत दरियाव जी

माया मुख जागै सबै

संत दरियाव जी

मंगलाचरण

सांयाजी झूला

रै मन

चतुरसिंह ‘महाराज’