युद्ध पर कवितावां

युद्ध संघर्ष की चरम

स्थिति है जो एक शांतिहीन अवस्था का संकेत देती है। युद्ध और शांति का लोक, राज और समाज पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। प्रस्तुत चयन में युद्ध और शांति और विभिन्न प्रसंगों में उनके रूपकों के साथ अभिव्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता37

मतीरे री राड़

सत्येन्द्र सिंह चारण झोरड़ा

प्रीत

चन्द्र प्रकाश देवल

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

रजवट रजथांण री

संतोष शेखावत ‘बरड़वा’

थारी आ कुचरणी

प्रहलादराय पारीक

जुद्ध

गोरधन सिंह शेखावत

मारग रौ कोढ

चन्द्र प्रकाश देवल

धरती री मुळक

रमेश मयंक

जुद्ध रो घाव

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

जुद्ध

सत्यप्रकाश जोशी

खुद सूं खुद रौ जुद्ध

गजेसिंह राजपुरोहित

बहुवचन

चन्द्र प्रकाश देवल

पाती मां री उग्रवादी नै

अन्नाराम ‘सुदामा'

जुध री खबरां

नंदकिशोर सोमानी ‘स्नेह'

रेत

मोनिका गौड़

हैं किरसण

हरमन चौहान

हथियार अर थारी कूंख

अर्जुन देव चारण

बदळती सभ्यता

गोरधन सिंह शेखावत

पूंजा

छोटूराम मीणा

सींव

नंदकिशोर सोमानी ‘स्नेह'

थूं कैयो

नंदकिशोर सोमानी ‘स्नेह'

सीस काट दी सैनांणी

संतोष शेखावत ‘बरड़वा’

धूड़कोट

गिरधारी सिंह पड़िहार

पड़तख गवाह

प्रमिला शरद व्यास

मां

तेजस मुंगेरिया

कविता

कुमार अजय

आखड़'र पड़ैला

मधु आचार्य 'आशावादी'

कळां भखै मिनखपणों

इन्द्रा व्यास

जुद्ध अर कवि

सत्यप्रकाश जोशी

जुद्ध

चन्द्र प्रकाश देवल

मेवाड़ और महाराणा प्रताप

ओमप्रकाश सरगरा 'अंकुर'

जुद्ध

रोशन बाफना

राड़

राजू सारसर 'राज'

सिसपाळ

गिरधारी सिंह पड़िहार

जीवण असली जंग

गजादान चारण ‘शक्तिसुत’