समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता404

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

समै रो संताप

नीतू शर्मा

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

घट्टी

मुकुट मणिराज

लेबल

माणक तिवारी 'बन्धु'

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

काळ

किशन ‘प्रणय’

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

बाई

विनोद स्वामी

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

छोर्‌यां

श्याम महर्षि

नरकवाड़ौ

मणि मधुकर

बदळाव री हूंक

रतन ‘राहगीर’

अघोरी काळ

कन्हैयालाल सेठिया

अड़ अर बगत सूं लड़

मनोज पुरोहित 'अनंत'

जुग रो हेलो

कल्याणसिंह राजावत

बगत

देवकरण जोशी 'दीपक'

टैम

गौरीशंकर निमिवाळ

कोई ठोड़ कोनी

शीन काफ़ पारीक

विग्यान

भगवती प्रसाद चौधरी

गुड़िया

मदनमोहन परिहार

उबाणै पांव

गोविन्द हाँकला

भुलाव

पॉल बोरम

आसरो

प्रभुदयाल मोठसरा

तौले जूण

संदीप 'निर्भय'

ओ मिनख भटकतो डोलै

राजू पारीक ‘उगाणी’

अगर चावो

रमेश मयंक

जांच

भगवती प्रसाद चौधरी

रोसनी अर गांव

मंगत बादल

स्यात

सुरेश जोशी

बगत

अस्त अली खां मलकांण

कऊ बुझ्यां पछै

प्रमिला शंकर

अन्तर सद्

दीनदयाल ओझा

मांनी जता मिनख

चंद्रशेखर अरोड़ा