समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता322

समै रो संताप

नीतू शर्मा

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

काळ

मणि मधुकर

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

काळ

किशन ‘प्रणय’

बाई

विनोद स्वामी

घट्टी

मुकुट मणिराज

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

सेवट

नंद भारद्वाज

बगत

हरि शंकर आचार्य

सिरजण री परिभासा

बरीस पास्तरनाक

पाणी रौ मोल

नाथूसिंह इंदा

कियां भागतो काळ

राजेश कुमार व्यास

वगत अणमोल

रोशन बाफना

बगत

कुमार अजय

दिन अर रात

राजदीप सिंह इन्दा

अग्यात कवि

रेवंत दान बारहठ

नेम

गौरीशंकर निमिवाळ

गोयल का गोल गप्पा

मनोहरलाल गोयल

ओलख

सेसिलिया मीरेल्स

माणस नै समझणो

बनवारीलाल अग्रवाल

मांय तौ नागा ई

सांवर दइया

दिन

मोहन आलोक

घर

रतनसिंह ‘रत्नेश’

ऊमर रै आखरी कनारा माथै

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

घड़ी

ओम पुरोहित ‘कागद’

डूंज-बायरा

भगवती लाल व्यास

गत-पत

मणि मधुकर

घणो व्हैग्यो है भाईड़ा

विनोद सोमानी 'हंस'

ईसकौ

येवजेनी येवतुरोंक

इतिहास री अबखी है चाल

राजेन्द्र बोहरा

हित्यारा कांईठा कुण?

लेस्ली पिंकनी हिल

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

लपट

आक्टेवियो पाज़