समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता372

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

समै रो संताप

नीतू शर्मा

काळ

मणि मधुकर

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

बाई

विनोद स्वामी

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

घट्टी

मुकुट मणिराज

काळ

किशन ‘प्रणय’

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

सरजण

पारस अरोड़ा

बगत

अस्त अली खां मलकांण

कऊ बुझ्यां पछै

प्रमिला शंकर

अन्तर सद्

दीनदयाल ओझा

मांनी जता मिनख

चंद्रशेखर अरोड़ा

ब्याह

विष्णुकुमार शर्मा ‘भोलापंछी’

किरसाण-जुवान

रतन ‘राहगीर’

खुली आंख रा सुपना

नरेंद्र व्यास

दूजी पीड़ मुलावै

सीताराम महर्षि

घड़ी ना कांटा

नरेन्द्रपाल जैन

आंख्यां

इरशाद अज़ीज़

लेनिन रै बखत

निकोलाइ अेस्येयेव

ल्यो करल्यां बात

बद्रीलाल मेहरादित्य

नुंवै बरस रौ दिन

माओत्से तुङ्ग

कुरुक्षेत्र

प्रमिला शंकर

आपरा आलोचकां सूं

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

कद मिलसी आजादी

शंकर दान चारण

गंदी हवा

चंद्रशेखर अरोड़ा

एक अंत बिहूण जातरा

रामस्वरूप ‘परेश’

उठ बटाऊ

नमामीशंकर आचार्य

अंगूठो

नीरज दइया

परेम का गीत

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

भेडां

श्याम महर्षि

म्हैं नीं

तेजसिंह जोधा

काळ

गोरधन सिंह शेखावत