समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता248

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

समै रो संताप

नीतू शर्मा

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

काळ

मणि मधुकर

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

किशन ‘प्रणय’

घट्टी

मुकुट मणिराज

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

जद म्हूँ न्हँ रहैउँगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

आंधौजुग

शंभुदान मेहडू

पतियारो

नवनीत पाण्डे

आखर

अर्जुनदेव चारण

जिनगाणी

श्याम सुन्दर टेलर

समै रो पगफेरो

शिवराज छंगाणी

बखत रौ मोल

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

बटुवो

हेमन्त शेष

जात्रा

अर्जुन अरविन्द

वगत ई वगतबायरौ है

नवनीत पाण्डे

बुण रह्यी हूं अेक सरीर

गैब्रिएला मिस्ट्राल

दरसाव

संजय कुमार नाहटा 'संजू'

दुपारौ

भंवर भादानी

मादेव

शैलेन्द्र उपाध्याय

घुड़दौड़

गोरधन सिंह शेखावत

छिण जको म्हारो

गोरधन सिंह शेखावत

थारो आणो

सतीश छिम्पा

वगत घड़िया उणियारा

सत्यदेव संवितेन्द्र

आळो

गौरीशंकर निमिवाळ

बगत री बात

ज़ेबा रशीद

चेतौ

गोरधन सिंह शेखावत

बैकवर्ड फॉरवर्ड

सतीश छिम्पा

बगत रो सागो

नमामीशंकर आचार्य

व्लादिमिर इलिच लेनिन

व्लादिमीर मायकोव्स्की

बगत रौ हेलो

अर्जुनसिंह शेखावत

आज री नारी

रमेश मयंक

कविता खोलै किंवाड़

राजेश कुमार व्यास

सुळ सुळियो

मोहम्मद सदीक

लत्ता

गोविन्द हाँकला

बदळग्यो बगत

गौरीशंकर प्रजापत

रिवाज री बुगची

सुमन पड़िहार