समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता276

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

समै रो संताप

नीतू शर्मा

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

काळ

मणि मधुकर

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

घट्टी

मुकुट मणिराज

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

काळ

किशन ‘प्रणय’

जात्रा

प्रसन्न कुमार मिश्र

बै सागी बातां

संदीप 'निर्भय'

दुखड़ा री घडयाँ

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

अंधार-पख

नंद भारद्वाज

बात

कमर मेवाड़ी

समै री डोर

इन्द्र प्रकाश श्रीमाली

नदी

इरशाद अज़ीज़

चौपड़-पासा

मणि मधुकर

मत देख, फाट्योड़ी पगरखी

चंद्रशेखर अरोड़ा

जद म्हूँ न्हँ रहैउँगो

हेमन्त गुप्ता पंकज

आंधौजुग

शंभुदान मेहडू

रोहिडै रो फूल

रतन ‘राहगीर’

पतियारो

नवनीत पाण्डे

आखर

अर्जुनदेव चारण

जिनगाणी

श्याम सुन्दर टेलर

समै रो पगफेरो

शिवराज छंगाणी

नेमप्लेट

महेन्द्र भानावत

बखत रौ मोल

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

आंख खोली जद सूं

बनवारीलाल अग्रवाल

बटुवो

हेमन्त शेष

डोर आपणी

जगदीशचन्द्र शर्मा

जात्रा

अर्जुन अरविन्द

वगत ई वगतबायरौ है

नवनीत पाण्डे

मादेव

शैलेन्द्र उपाध्याय

घुड़दौड़

गोरधन सिंह शेखावत

छिण जको म्हारो

गोरधन सिंह शेखावत

थारो आणो

सतीश छिम्पा

वगत घड़िया उणियारा

सत्यदेव संवितेन्द्र

आळो

गौरीशंकर निमिवाळ

बगत री बात

ज़ेबा रशीद