समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता394

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

समै रो संताप

नीतू शर्मा

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

काळ

मणि मधुकर

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

घट्टी

मुकुट मणिराज

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बाई

विनोद स्वामी

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

लेबल

माणक तिवारी 'बन्धु'

काळ

किशन ‘प्रणय’

आंख खोली जद सूं

बनवारीलाल अग्रवाल

ओ डूंगरमाळ

माओत्से तुङ्ग

विकास

सुखदेव राव

बटुवो

हेमंत शेष

डोर आपणी

जगदीशचन्द्र शर्मा

दीपक राग

किशोर कल्पनाकान्त

निरमाण कै विनाश?

भागीरथ मेघवाल

बगत

गोपाल जैन

अर्थशास्त्री

श्याम महर्षि

पैलां अर अबै

मदन गोपाल लढ़ा

कुचरणी

ओम पुरोहित ‘कागद’

रिवाज री बुगची

सुमन पड़िहार

चिंत्या अर चिंतन

राधेश्याम 'अटल'

जीव, जीव तौ अेक

मोहम्मद सदीक

नुवौ फेरौ

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

आवणियो काल

गोविन्द शंकर कुरुप

खोज

नजाबुलो एस. नदेवल

म्हारा विचार

रतन ‘राहगीर’

उगायो भोर रो तारो

भीम पांडिया

सदी रौ सांच

महेंद्रसिंह छायण

हूण

अलेक्जांदर ब्लोक

अखबार

सुनील कुमार

बखत रौ मोल

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

वंदण

रसूल हमजातोव

दुपारौ

भंवर भादानी

सब राजी खुसी छ

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’