समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता378

समै रो संताप

नीतू शर्मा

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

काळ

मणि मधुकर

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

बाई

विनोद स्वामी

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

घट्टी

मुकुट मणिराज

काळ

किशन ‘प्रणय’

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

आंख खोली जद सूं

बनवारीलाल अग्रवाल

ओ डूंगरमाळ

माओत्से तुङ्ग

विकास

सुखदेव राव

बटुवो

हेमंत शेष

डोर आपणी

जगदीशचन्द्र शर्मा

जात्रा

अर्जुन अरविन्द

वगत ई वगतबायरौ है

नवनीत पाण्डे

बुण रह्यी हूं अेक सरीर

गैब्रिएला मिस्ट्राल

दरसाव

संजय कुमार नाहटा 'संजू'

दीपक राग

किशोर कल्पनाकान्त

निरमाण कै विनाश?

भागीरथ मेघवाल

बगत

गोपाल जैन

अर्थशास्त्री

श्याम महर्षि

वंदण

रसूल हमजातोव

दुपारौ

भंवर भादानी

सब राजी खुसी छ

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

भख

सुखदेव राव

म्हारी मां अजै है

मीठालाल खत्री

चीणी चाळा काटगी

भंवरलाल महरिया 'भंवरो'

थाकैलौ

फ़ेंटन जॉनसन

आपरी चूंच

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

इन्सानियत

गौरीशंकर 'मधुकर'

दस दूहा : आंख माथै

कुंदन सिंह 'सजल'

बखत आयग्यो भाई! भाई!

गिरधरदान रतनू दासोड़ी

इतिहास-पख

पारस अरोड़ा

सोवण शंख

महावीर जोशी