समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता359

समै रो संताप

नीतू शर्मा

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

काळ

मणि मधुकर

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

बाई

विनोद स्वामी

घट्टी

मुकुट मणिराज

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

काळ

किशन ‘प्रणय’

भख

सुखदेव राव

म्हारी मां अजै है

मीठालाल खत्री

थाकैलौ

फ़ेंटन जॉनसन

आपरी चूंच

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

इन्सानियत

गौरीशंकर 'मधुकर'

दस दूहा : आंख माथै

कुंदन सिंह 'सजल'

बखत आयग्यो भाई! भाई!

गिरधरदान रतनू दासोड़ी

इतिहास-पख

पारस अरोड़ा

धुंवाड़ौ

उपेन्द्र अणु

म्हारो भायलो

रतन ‘राहगीर’

रोई रा रूंख

रामस्वरूप ‘परेश’

जे थै अगन हौ

मुलदागालीयेव

कुरुक्षेत्र

प्रमिला शंकर

आपरा आलोचकां सूं

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

कद मिलसी आजादी

शंकर दान चारण

गंदी हवा

चंद्रशेखर अरोड़ा

एक अंत बिहूण जातरा

रामस्वरूप ‘परेश’

आंख खोली जद सूं

बनवारीलाल अग्रवाल

ओ डूंगरमाळ

माओत्से तुङ्ग

विकास

सुखदेव राव

बटुवो

हेमन्त शेष

डोर आपणी

जगदीशचन्द्र शर्मा

जात्रा

अर्जुन अरविन्द

वगत ई वगतबायरौ है

नवनीत पाण्डे

बुण रह्यी हूं अेक सरीर

गैब्रिएला मिस्ट्राल

दरसाव

संजय कुमार नाहटा 'संजू'