समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता389

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

समै रो संताप

नीतू शर्मा

काळ

मणि मधुकर

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

घट्टी

मुकुट मणिराज

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

बाई

विनोद स्वामी

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

काळ

किशन ‘प्रणय’

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

छोर्‌यां

श्याम महर्षि

ओ मिनख भटकतो डोलै

राजू पारीक ‘उगाणी’

अगर चावो

रमेश मयंक

जांच

भगवती प्रसाद चौधरी

रोसनी अर गांव

मंगत बादल

स्यात

सुरेश जोशी

बगत

अस्त अली खां मलकांण

कऊ बुझ्यां पछै

प्रमिला शंकर

अन्तर सद्

दीनदयाल ओझा

मांनी जता मिनख

चंद्रशेखर अरोड़ा

ब्याह

विष्णुकुमार शर्मा ‘भोलापंछी’

किरसाण-जुवान

रतन ‘राहगीर’

अै सवाल

ओंकार श्री

नुंवो बरस

विक्रमसिंह गून्दोज

बगतसर चालां घरै

सुरेन्द्र सुन्दरम

मा निषाद

रचना शेखावत

मोट्यारी

मोहन सिंह भाटी

काळी-पीळी आंधी

प्रमिला शंकर

जात्रा

प्रसन्न कुमार मिश्र

बै सागी बातां

संदीप 'निर्भय'

दुखड़ा री घडयाँ

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

अंधार-पख

नंद भारद्वाज

गमायो

पारस अरोड़ा

अेक दिन

रमेश मयंक