समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता368

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

समै रो संताप

नीतू शर्मा

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

काळ

मणि मधुकर

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बाई

विनोद स्वामी

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

घट्टी

मुकुट मणिराज

काळ

किशन ‘प्रणय’

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

आ बैठ बात करां - 7

रामस्वरूप किसान

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

माणस नै समझणो

बनवारीलाल अग्रवाल

मांय तौ नागा ई

सांवर दइया

दिन

मोहन आलोक

घर

रतनसिंह ‘रत्नेश’

ऊमर रै आखरी कनारा माथै

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

घड़ी

ओम पुरोहित ‘कागद’

आंधळघोटौ

प्रमिला शंकर

डूंज-बायरा

भगवती लाल व्यास

गत-पत

मणि मधुकर

घणो व्हैग्यो है भाईड़ा

विनोद सोमानी 'हंस'

ईसकौ

येवजेनी येवतुरोंक

इतिहास री अबखी है चाल

राजेन्द्र बोहरा

हित्यारा कांईठा कुण?

लेस्ली पिंकनी हिल

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

बखत रो मर्सियो

सत्यनारायण व्यास

संभल जा

नगेन्द्र नारायण किराडू

काळ

चंद्रशेखर अरोड़ा

समै रो फेर

उगमसिंह राजपुरोहित 'दिलीप'

समै रो फेर

दीपचन्द सुथार

पतियारौ

कानसिंह भाटी

मंगळ सूत्र

गोपाल जैन

गढ़ बोल्यो

गोरधन सिंह शेखावत

मा खातर कविता

नीरज दइया

रेलगाडी

इवान इवानवी

बगत

सुधीर राखेचा

लै संभाळ थारौ कविकरम

शिवराज छंगाणी

हूं इण गीतां नैं सुणतो रयो

व्लादिमिर किरीलोव