समै पर कवितावां

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता279

ओळूं

आईदान सिंह भाटी

समै रो संताप

नीतू शर्मा

आ बैठ बात करां - 1

रामस्वरूप किसान

काळ

मणि मधुकर

बात कोनी

उषा राजश्री राठौड़

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

संबंधा रा डोरा

अनुश्री राठौड़

बगत

कन्हैयालाल सेठिया

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

काळ

कन्हैयालाल सेठिया

बूढ़ी डोकरी

पवन सिहाग 'अनाम'

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

घट्टी

मुकुट मणिराज

काळ

किशन ‘प्रणय’

गुप्तचर

शक्ति चट्टोपाध्याय

मादेव

शैलेन्द्र उपाध्याय

घुड़दौड़

गोरधन सिंह शेखावत

दुपारौ

भंवर भादानी

सब राजी खुसी छ

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

काळौ घोड़ो

मणि मधुकर

ओ मानखो बीत्यो जावै

मुखराम माकड़ ‘माहिर’

रमतियो

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

ऊनाळै रो बाग

अन्ना अख्मातोवा

सज रैया है कैक्टस

किशोर कुमार निर्वाण

घर-घर री आ ही कहाणी है

मुखराम माकड़ ‘माहिर’

बगत री नदी

इरशाद अज़ीज़

घर बाबत

नीरज दइया

लीला हुसार

निकोलाइ अेस्येयेव

कदमताळ

गोरधन सिंह शेखावत

औ जमारौ

सुधीर राखेचा

ओळ्यूं

भारती पुरोहित

अजै जूझणो पड़सी

मोहम्मद सदीक

थोथा घर

चंद्रशेखर अरोड़ा

व कुण है

चंद्रशेखर अरोड़ा

मिनख वास्ते

सांवर दइया

हाड़ी बाढतां

सत्यनारायण सोनी

बगत बाकी है

रमेश मयंक

कळजुग

नीतू शर्मा

हवेली

रोशन बाफना