समै पर सोरठा

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

सोरठा18

जबर जबर जोधार

साह मोहनराज

बगत बायरो

शंकरदान सामौर

वाइस उडी बलाइ ल्युं

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

समझणहार सुजांण

कृपाराम खिड़िया

भव तूं जाणै भेव

रामनाथ कविया

गुण बिन करै गरूर

साह मोहनराज

बचणौ मुश्किल बात

साह मोहनराज

समय न चूकौ सैण

साह मोहनराज

सब दिन नहीं समान

साह मोहनराज

बिपता बुरी बलाय

साह मोहनराज

दुख में दोसत दोय

साह मोहनराज

रावण सरखो राव

साह मोहनराज

बखत जावसी बीत

साह मोहनराज

आज हि नहीं अबार

साह मोहनराज

कांइ करै अणराय

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’