समै पर ग़ज़ल

समय अनुभव का सातत्य

है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।

ग़ज़ल18

अठीनै सूं निकळसी बा

भागीरथसिंह भाग्य

पिता जैड़ा पूत आज रा

आईदान सिंह भाटी

म्हारै भावै रोटी खाव

मनोहरलाल गोयल

बोल थारो काई हाल छै

हेमन्त गुप्ता पंकज

अस्यौ कस्यौ रूंख

विनोद सोमानी 'हंस'

अै खिलाड़ी बावळा है

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

ढाणी म्हानै जमांणी छै

लक्ष्मणदान कविया

बात ई बात में

लियाकत अली खां ‘भावुक’

लोग जो मद में चूर हुया

कुंदन सिंह 'सजल'

लोग घणां ई घूमबा-फरबा जावै छै

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

किण माथै इतरावै भाया

मनोहरलाल गोयल

थे तो हद सूं ई बध गया जी

पुरुषोत्तम 'यकीन'

काल की चंता कांई

पुरुषोत्तम 'यकीन'

ढाणी ढाणी फिरतां

लक्ष्मणदान कविया

नीठा नीठ जमी ढाणी छै

लक्ष्मणदान कविया

बड़ा लोग है बात बड़ी

मनोहरलाल गोयल