सुमिरण पर सबद

इष्ट और गुरु का सुमिरन

भक्ति-काव्य का प्रमुख ध्येय रहा है। प्रस्तुत चयन में सुमिरन के महत्त्व पर बल देती कविताओं को शामिल किया गया है।

सबद31

सजन सनेह रा वे

हरिदास निरंजनी

राम रस मीठा रे अब

हरिदास निरंजनी

राम भजन हिरदै नहीं हेत

हरिदास निरंजनी

तब हम हरि गुण गावेंगे

हरिदास निरंजनी

अचरज देखा भारी साधो

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

संतो..! राम रजा मैं रहिए

हरिदास निरंजनी

मेछ मळन घर ओतर्‌या

सिद्ध संत कूंपोजी