घर पर कवितावां

महज़ चहारदीवारी को ही

घर नहीं कहते हैं। दरअस्ल, घर एक ‘इमोशन’ (भाव) है। यहाँ प्रस्तुत है—इस जज़्बे से जुड़ी हिंदी कविताओं का सबसे बड़ा चयन।

कविता111

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

घर अर फळसौ

आईदान सिंह भाटी

घट्टी

मुकुट मणिराज

म्हारै पुराणियां घर री

मृदुला राजपुरोहित

थळी रा संस्कार

राजूराम बिजारणियां

बडेरा

रचना शेखावत

घर

प्रवीण सुथार

बात बीतगी

राजूराम बिजारणियां

घर मोढां पर

राजूराम बिजारणियां

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

घर

विनोद स्वामी

कारीगरी

राजूराम बिजारणियां

घरे आजा

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

हिरोशिमा-नागासाकी

राजूराम बिजारणियां

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

आदमी बरद बणी ने रई ग्यो

घनश्याम प्यासा

मशीन

ऋतुप्रिया

बदळाव

निशान्त

भींत

हरीश हैरी

नदी

जगदीश गिरी

मिन्दर

राजेन्द्र सिंह चारण

देखल्यो हजार बार

कानदान ‘कल्पित’

मां

तेजस मुंगेरिया

घर

अशोक परिहार 'उदय'

घर

संजू श्रीमाली

गिरस्ती काची पड़ी

तारादत्त निर्विरोध

दीतवार रै दिन

भगवती लाल व्यास

सराप

रचना शेखावत

पंखो

लक्ष्मीनारायण रंगा

टापरी

रमेश मयंक

इनाम

ऋतुप्रिया

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

आपणौ घर

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

बीं सागण भौम

मदन गोपाल लढ़ा

दीवो : तीन चितराम

रचना शेखावत

म्हारी छात

नरेश मेहन

भेद

ऋतुप्रिया

जुद्ध रो घाव

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

बेटी रो घर

कृष्णा आचार्य

मायड़ रौ परस

भारती कविया

धन

धनंजया अमरावत

कठै ढोई है

नवनीत पाण्डे