लोक पर गीत

सबदकोसां में लोक रौ

अरथ घणै अरथां में लेईज्यौ है। कठैई इणरौ अरथ 'प्रजा' मानीज्यौ है तो कठैई 'मानखै' रै अरथ में इणनै लीरीज्यौ है। अठै प्रस्तुत रचनावां लोक सबद रै आखती-पाखती रचियोड़ी है।

गीत79

मुरधर म्हारो देस

कानदान ‘कल्पित’

उडीक

मेघराज मुकुल

सुणज्यो नेताजी

कानदान ‘कल्पित’

हालो हेमाळे

कानदान ‘कल्पित’

लिछमी

रेवतदान चारण कल्पित

कामणी

मोहम्मद सदीक

गांव

मुकुट मणिराज

हब्बीड़ो

कानदान ‘कल्पित’

बाबा थारी बकरियां

मोहम्मद सदीक

बायरियौ

रेवतदान चारण कल्पित

पनवाड़ी

मुकुट मणिराज

माणीगर आवै है

किशोर कल्पनाकान्त

डर सूं डरो

मोहम्मद सदीक

जद झुकै सीस

मनुज देपावत

पणिहारी

बुलाकी दास बावरा

पीहर की पगडण्डी

किशन लाल वर्मा

गीत : समझावणी रो

ओंकार श्री

गीत

ओमप्रकाश लीची ‘दिल’

फागण आयो राज

किशोर कल्पनाकान्त

हाळी हलकारौ दे

गजानन वर्मा

सवारता–सवारता

कानदान ‘कल्पित’

हळोतियौ

रेवतदान चारण कल्पित

लाडली

मुकुट मणिराज

कोई मन भरमावै रे

बुलाकी दास बावरा

बाड़ खेत नै खावै है

मोहम्मद सदीक

घुघी दे दे मावड़ी

भागीरथसिंह भाग्य

दीवाळी रो गीत

गजानन वर्मा

म्हांरी माटी म्हांरी मा

बुलाकी दास बावरा

आंसू क्यूं बरसावै?

किशोर कल्पनाकान्त

बिदाई

प्रभात

गीत : धन-धीणे रो

ओंकार श्री

हँसो

किशन लाल वर्मा

नूवां अरथ

मोहम्मद सदीक

फागण आयो रे

बुलाकी दास बावरा

गीत : राईकै रो

ओंकार श्री

मास बरसालो आयो रे

कानदान ‘कल्पित’

पग डांडी रा मोड़

मोहम्मद सदीक

सावण में नी आवड़ै

किशोर कल्पनाकान्त

दुख री लागी दूणा

मोहम्मद सदीक

मूळ कठै अर डाळ कठै

कल्याणसिंह राजावत

धर कूचां

गजानन वर्मा

अपणायत इसी जगा ले तूं

मुनि बुद्धमल्ल

कोई गीता गाई व्हैला

कानदान ‘कल्पित’