लोक पर गीत

सबदकोसां में लोक रौ

अरथ घणै अरथां में लेईज्यौ है। कठैई इणरौ अरथ 'प्रजा' मानीज्यौ है तो कठैई 'मानखै' रै अरथ में इणनै लीरीज्यौ है। अठै प्रस्तुत रचनावां लोक सबद रै आखती-पाखती रचियोड़ी है।

गीत66

मुरधर म्हारो देस

कानदान ‘कल्पित’

कामणी

मोहम्मद सदीक

लिछमी

रेवतदान चारण कल्पित

गांव

मुकुट मणिराज

हालो हेमाळे

कानदान ‘कल्पित’

सुणज्यो नेताजी

कानदान ‘कल्पित’

बाबा थारी बकरियां

मोहम्मद सदीक

बायरियौ

रेवतदान चारण कल्पित

पनवाड़ी

मुकुट मणिराज

माणीगर आवै है

किशोर कल्पनाकान्त

डर सूं डरो

मोहम्मद सदीक

जद झुकै सीस

मनुज देपावत

पणिहारी

बुलाकी दास बावरा

पीहर की पगडण्डी

किशन लाल वर्मा

फागण आयो राज

किशोर कल्पनाकान्त

सवारता–सवारता

कानदान ‘कल्पित’

हळोतियौ

रेवतदान चारण कल्पित

मरवण! तार बजा

किशोर कल्पनाकान्त

तोरण

किशन लाल वर्मा

मौत सांसां नै छलगी रे

भागीरथसिंह भाग्य

तामझामसा

मोहम्मद सदीक

होळी गावण दे

कल्याणसिंह राजावत

सात जुगां रौ लेखौ

रेवतदान चारण कल्पित

दोघड़ क्यूं रीती थारी?

किशोर कल्पनाकान्त

निदांण

रेवतदान चारण कल्पित

अपणायत इसी जगा ले तूं

मुनि बुद्धमल्ल

कोई गीता गाई व्हैला

कानदान ‘कल्पित’

महिनो फागण रो

कानदान ‘कल्पित’

आलीजौ भंवर

रेवतदान चारण कल्पित

जाणे कुण?

किशन लाल वर्मा

मतवाली जोगण

किशन लाल वर्मा

कठीकर आवै अे?

किशोर कल्पनाकान्त

हब्बीड़ो

कानदान ‘कल्पित’

लाडली

मुकुट मणिराज

कोई मन भरमावै रे

बुलाकी दास बावरा

बाड़ खेत नै खावै है

मोहम्मद सदीक

घुघी दे दे मावड़ी

भागीरथसिंह भाग्य

मास बरसालो आयो रे

कानदान ‘कल्पित’

पग डांडी रा मोड़

मोहम्मद सदीक

सावण में नी आवड़ै

किशोर कल्पनाकान्त