लोक पर गीत

सबदकोसां में लोक रौ

अरथ घणै अरथां में लेईज्यौ है। कठैई इणरौ अरथ 'प्रजा' मानीज्यौ है तो कठैई 'मानखै' रै अरथ में इणनै लीरीज्यौ है। अठै प्रस्तुत रचनावां लोक सबद रै आखती-पाखती रचियोड़ी है।

गीत83

मुरधर म्हारो देस

कानदान ‘कल्पित’

उडीक

मेघराज मुकुल

सुणज्यो नेताजी

कानदान ‘कल्पित’

हालो हेमाळे

कानदान ‘कल्पित’

लिछमी

रेवतदान चारण कल्पित

बाबा थारी बकरियां

मोहम्मद सदीक

चुणाव रौ चत्रमासौ

शक्तिदान कविया

गांव

मुकुट मणिराज

हब्बीड़ो

कानदान ‘कल्पित’

बाड़ खेत नै खावै है

मोहम्मद सदीक

कामणी

मोहम्मद सदीक

हँसो

किशन लाल वर्मा

नूवां अरथ

मोहम्मद सदीक

घुघी दे दे मावड़ी

भागीरथसिंह भाग्य

दीवाळी रो गीत

गजानन वर्मा

लाडली

मुकुट मणिराज

कोई मन भरमावै रे

बुलाकी दास बावरा

फूल फूल रौ मोल

कल्याणसिंह राजावत

चांदो रुप रो डळो

मोहन मण्डेला

अेक बटावू भटकै

किशोर कल्पनाकान्त

ओळमो

मुकुट मणिराज

नुंवली गीता रो ज्ञान

किशोर कल्पनाकान्त

पड़दै रै भीतर

कानदान ‘कल्पित’

सन्यासी

भागीरथसिंह भाग्य

बायरियौ

रेवतदान चारण कल्पित

पनवाड़ी

मुकुट मणिराज

माणीगर आवै है

किशोर कल्पनाकान्त

डर सूं डरो

मोहम्मद सदीक

जद झुकै सीस

मनुज देपावत

पणिहारी

बुलाकी दास बावरा

पीहर की पगडण्डी

किशन लाल वर्मा

गीत : समझावणी रो

ओंकार श्री

गीत

ओमप्रकाश लीची ‘दिल’

फागण आयो राज

किशोर कल्पनाकान्त

हाळी हलकारौ दे

गजानन वर्मा

सवारता–सवारता

कानदान ‘कल्पित’

हळोतियौ

रेवतदान चारण कल्पित

गीत : राईकै रो

ओंकार श्री

मास बरसालो आयो रे

कानदान ‘कल्पित’

पग डांडी रा मोड़

मोहम्मद सदीक

सावण में नी आवड़ै

किशोर कल्पनाकान्त