लोक पर लेख
सबदकोसां में लोक रौ
अरथ घणै अरथां में लेईज्यौ है। कठैई इणरौ अरथ 'प्रजा' मानीज्यौ है तो कठैई 'मानखै' रै अरथ में इणनै लीरीज्यौ है। अठै प्रस्तुत रचनावां लोक सबद रै आखती-पाखती रचियोड़ी है।
अरथ घणै अरथां में लेईज्यौ है। कठैई इणरौ अरथ 'प्रजा' मानीज्यौ है तो कठैई 'मानखै' रै अरथ में इणनै लीरीज्यौ है। अठै प्रस्तुत रचनावां लोक सबद रै आखती-पाखती रचियोड़ी है।
यूं तो मनख की जिनगाणी की सांची मुगती मानवता की सेवा में छै। पण अेक ई जिनगाणी में समाज अर देस कै लेखै समरपण, पीढयां तांई वांकी अंधेरी गैल में उजास दैबा को कारज करै छै। समरपण को यो भाव अस्यां ई न्हं आ जावै, घणा जीवट को कारज छै। जिनगाणी की अबखाया नै आपणी
संसार री भासावां बोलियां रो सर्वेक्षण करणिया भासाविदां रो मानणो है कै आखै जगत मांय 7000 सूं बेसी बासावां बोलियां है, जिणां मांय सूं अेकलै अेसिया महाद्वीप मांय 2500 भासावां बोलियां है। संसार री भासावां रो अध्ययन करण आळी संस्था अेथनोलॉग (Ethnologue) मुजब
म्हारौ जलम 15 अप्रैल रै दिन जयपुर शहर में हुयौ। वठै री सरजमीं रै माथै ई म्हैं होस संभाळ्यौ। बठै गोडाळियां चालणौ सीख्यौ, अर बठै ई मां-पा-बा इत्याद सबद कैवणौ सीख्यौ। बठै ई पढ-लिख’र परवांन चढ्यौ। रथखांनै रै नजदीक हवाम्हैल रै सामनै री स्कूल में अंग्रेजी