लोक पर कवितावां

सबदकोसां में लोक रौ

अरथ घणै अरथां में लेईज्यौ है। कठैई इणरौ अरथ 'प्रजा' मानीज्यौ है तो कठैई 'मानखै' रै अरथ में इणनै लीरीज्यौ है। अठै प्रस्तुत रचनावां लोक सबद रै आखती-पाखती रचियोड़ी है।

कविता363

चंवरी

मेघराज मुकुल

इंकलाब री आँधी

रेवतदान चारण कल्पित

प्रेम री परिभाषा

सत्येंद्र चारण

सुभाव

अंजु कल्याणवत

टावर

देवीलाल महिया

मायड़ भासा

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

ढाणी

देवीलाल महिया

पिरोळ में कुत्ती ब्याई

अन्नाराम ‘सुदामा'

याद

विजय राही

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

ओ गांव है

रामस्वरूप किसान

म्हैं आवूंला जरूर

गोरधन सिंह शेखावत

स्वाद

आईदान सिंह भाटी

कठा सूं आवै है सबद

भगवती लाल व्यास

रोयां रुजगार मिळै कोनीं

रेवतदान चारण कल्पित

घूमर

नारायण सिंह भाटी

करसाण

शिव 'मृदुल'

प्रवासी

चन्द्र प्रकाश देवल

सोरठ

नारायण सिंह भाटी

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

जिंदगी

उषा राजश्री राठौड़

जठै देखलां भरी परात

आईदान सिंह भाटी

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

अलमारी

मणि मधुकर

परायो धन

अनुश्री राठौड़

नैनी कवितावां

ओंकार श्री

पडूतर

आईदान सिंह भाटी

बायरिया!

नैनमल जैन

म्हारी दीठ

अर्जुनदेव चारण

गांव री कांदा-रोटी

मृदुला राजपुरोहित

प्रणधारी पाबू

महेंद्रसिंह छायण

लुगाई

उषा राजश्री राठौड़

काको पीवे हो अतरी दारू

उषा राजश्री राठौड़

फागण आयो रे

रघुराजसिंह हाड़ा

छेहली बातचीत

रेवंत दान बारहठ

म्हनै लिखणौ नीं आवै

पवन सिहाग 'अनाम'

अणबोली बात

विजय राही

आटा की चालणी

उषा राजश्री राठौड़

जे म्हैं आदमी होऊँ

विमला महरिया 'मौज'

उडीक

नंद भारद्वाज

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

गाम

यतीन्द्र पूनियां

सांझ-सुंदरी

महेंद्रसिंह छायण

मोरियो

अंजु कल्याणवत

म्हूँ जनता हूँ

भगवती लाल व्यास

रंग विहूणौ

महेंद्रसिंह छायण

भैण-भाई

यतीन्द्र पूनियां