वैवार पर कवितावां

वैवार सबद लोक में सांवठौ

अनै प्रतिबद्ध अर्थ राखै। वैवार सूं लोक रा आचार बणै अर बिगड़ै। अठै प्रस्तुत रचनावां वैवार रै वैवार माथै केन्द्रित है।

कविता234

मार्क्स

शिव बोधि

कोराना रो कहर

रामाराम चौधरी

मिजाज

कैलाश मंडेला

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

म्हूं के बोलूं

अखिलेश्वर

राजस्थानी बातां

रामाराम चौधरी

आसीस

नगेन्द्र नारायण किराडू

पिछाण

कैलाश मंडेला

सूरज-उगाळी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

मतलब्या

कैलाश मंडेला

धरती रो हेलो

मेघराज मुकुल

म्हे आज बोलां छां

हीरालाल शास्त्री

पैली वाळौ गांव कठै है

छगनराज राव 'दीप'

खूंटो

सुनील कुमार

जिनावर अर मिनख

रामस्वरूप ‘परेश’

कागला

नवनीत पाण्डे

यादां रो अड़ाव

कृष्ण बृहस्पति

भैस्यां

श्याम महर्षि

चेतो चेतो

सरल विशारद

अंगूठो

जयकुमार ‘रुसवा’

डाकी दायजो

कान्ह महर्षि

टूणो

सन्तोष मायामोहन

मोसमी कूकड़ा

मोहम्मद सदीक

बहरूपियो

रामकुमार भाम्भू

कीड़ी

अशोक परिहार 'उदय'

जगत रो मिजाज

रेणुका व्यास 'नीलम'

अणख

लालचन्द मानव

राजहंसां रो देसूंटो

सुमेरसिंह शेखावत

गांव

कमल किशोर पिपलवा

जिद

मनमीत सोनी

गरीब

सत्यनारायण ‘सत्य’

मन की गांठ्यां खोल

प्रीतिमा ‘पुलक’

कवियाँ रो राजस्थान

अवन्तिका तूनवाल

टापरी

रमेश मयंक

समै रो पगफेरो

शिवराज छंगाणी

आव अभिमन्यु आज रा

राजेन्द्र बोहरा

पाठ्य-पुस्तक

ब्रज नारायण कौशिक

बईयाल

आनन्द जगाणी

जिग्यां

मनोज कुमार स्वामी

हार-जीत

महेंद्र कुमार मोहता

सहीद री व्यथा

फारूक़ आफरीदी

परिणाम मिळैला

जेठानंद पंवार

आ तो होवणी ई ही

देवकरण जोशी 'दीपक'

लेखो

राजेनंद्र शेखावत