वैवार पर कवितावां

वैवार सबद लोक में सांवठौ

अनै प्रतिबद्ध अर्थ राखै। वैवार सूं लोक रा आचार बणै अर बिगड़ै। अठै प्रस्तुत रचनावां वैवार रै वैवार माथै केन्द्रित है।

कविता248

मार्क्स

शिव बोधि

कोराना रो कहर

रामाराम चौधरी

मिजाज

कैलाश मंडेला

राजस्थानी बातां

रामाराम चौधरी

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

म्हूं के बोलूं

अखिलेश्वर

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

आसीस

नगेन्द्र नारायण किराडू

पिछाण

कैलाश मंडेला

सूरज-उगाळी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

मतलब्या

कैलाश मंडेला

धरती रो हेलो

मेघराज मुकुल

म्हे आज बोलां छां

हीरालाल शास्त्री

पैली वाळौ गांव कठै है

छगनराज राव 'दीप'

खूंटो

सुनील कुमार

जिनावर अर मिनख

रामस्वरूप ‘परेश’

वृद्धा-रूप

कल्याण गौतम

नेता

अनुज श्रीमाली ‘भाल कवि’

घसूल्या

राजेन्द्र गौड़ 'धूळेट'

सहारो

अंकिता पुरोहित

अणूती रीत

मोर पांख

अनुभवां री लाठी

प्रियंका भट्ट

गरीब

सत्यनारायण ‘सत्य’

मन की गांठ्यां खोल

प्रीतिमा ‘पुलक’

कवियाँ रो राजस्थान

अवन्तिका तूनवाल

टापरी

रमेश मयंक

समै रो पगफेरो

शिवराज छंगाणी

आव अभिमन्यु आज रा

राजेन्द्र बोहरा

पाठ्य-पुस्तक

ब्रज नारायण कौशिक

बईयाल

आनन्द जगाणी

जिग्यां

मनोज कुमार स्वामी

हार-जीत

महेंद्र कुमार मोहता

सहीद री व्यथा

फारूक़ आफरीदी

परिणाम मिळैला

जेठानंद पंवार

आ तो होवणी ई ही

देवकरण जोशी 'दीपक'

लेखो

राजेनंद्र शेखावत

बाजबा लाग्यौ तातौ-तातौ बायरौ

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

काल अर आज

ज़ेबा रशीद

चमचो

अनुज श्रीमाली ‘भाल कवि’

क्यूं

हरीश हैरी

बाड़

देवीलाल महिया

पणिहारी

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

रळकायोड़ा मोती

मेघराज मुकुल