वैवार पर कवितावां

वैवार सबद लोक में सांवठौ

अनै प्रतिबद्ध अर्थ राखै। वैवार सूं लोक रा आचार बणै अर बिगड़ै। अठै प्रस्तुत रचनावां वैवार रै वैवार माथै केन्द्रित है।

कविता257

मार्क्स

शिव बोधि

म्हूं के बोलूं

अखिलेश्वर

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

म्हारी उमर

रामाराम चौधरी

मिजाज

कैलाश मंडेला

राजस्थानी बातां

रामाराम चौधरी

कोराना रो कहर

रामाराम चौधरी

बदळाव

तारासिंह

आप री आप जाणों

अजय कुमार सोनी

इणां रै चायां

विनोद सोमानी 'हंस'

खतरौ घणौ है दुणिया माय

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

नीसांणी

ठाकुर प्रेमसिंह ऊदावत

दुनियादारी

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

हेत प्रीत री हथाई

नाथूसिंह इंदा

अडाणैं रो इतियास

रवि पुरोहित

दादी रो गणित

कृष्ण कुमार स्वामी

जंगळ सूं निकळ

मंगत बादल

चांद रो चितराम

चैन सिंह शेखावत

राजीपो

राणुसिंह राजपुरोहित

बोलणो

दीनदयाल शर्मा

भींत

महेंद्र मोदी

अंध विश्वास

रतन ‘राहगीर’

सूरज टंटोळता रह्या

त्रिलोक गोयल

एक मांदो गांव’र मैं

रामस्वरूप ‘परेश’

कागलां रै गांव में

महावीर प्रसाद जोशी

घर

सुधीर राखेचा

मनख-बावळो

प्रीतिमा ‘पुलक’

थूं

सत्येन जोशी

गड़ीसर

कमल सिंह सुल्ताना

सूरज नै ढूंढ़ो

भानसिंह शेखावत ‘मरूधर’

रगत और प्राण

भागीरथ मेघवाल

बसेवान

अनिल अबूझ

मन रौ बोझ

कल्याणसिंह राजावत

पेट री भूख

विक्रमसिंह गून्दोज

सीळी झील

प्रेम शेखावत पंछी

विधना

कमल रंगा

मोसर

कृष्ण कुमार स्वामी

बदळाव

कल्याण गौतम

बिदाई री बेळ्यां

सुनीता बिश्नोलिया

गांधी बाबौ

राजेन्द्र बारहठ

नुंवो जीवण

विक्रमसिंह गून्दोज

अभियान

इन्द्रा व्यास

आगेरा आंक

कान्ह महर्षि

कीड़ी

वासु आचार्य

अहंकार

विनोद सोमानी 'हंस'