वैवार पर छंदां

वैवार सबद लोक में सांवठौ

अनै प्रतिबद्ध अर्थ राखै। वैवार सूं लोक रा आचार बणै अर बिगड़ै। अठै प्रस्तुत रचनावां वैवार रै वैवार माथै केन्द्रित है।

छंद7

मै'मा नारी री

मुखराम माकड़ ‘माहिर’

बिरखा री रुत आई

अनिता सैनी

हकीमखां सूर

देवकर्ण सिंह

गागरोणि अचलेस सजे गढ

सूर्यमल्ल मीसण