संसार पर सबद

‘संसरति इति संसारः’—अर्थात

जो लगातार गतिशील है, वही संसार है। भारतीय चिंतनधारा में जीव, जगत और ब्रहम पर पर्याप्त विचार किया गया है। संसार का सामान्य अर्थ विश्व, इहलोक, जीवन का जंजाल, गृहस्थी, घर-संसार, दृश्य जगत आदि है। इस चयन में संसार और इसकी इहलीलाओं को विषय बनाती कविताओं का संकलन किया गया है।

सबद2

वाहवा क्या खेल रचाया है

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

अेसा ज्ञान हमारा साधो

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द