गुरु पर सबद

मध्यकालीन काव्य में

गुरु की महिमा की समृद्ध चर्चा मिलती है। प्रस्तुत संचयन में गुरु-संबंधी काव्य-रूपों और आधुनिक संदर्भ में शिक्षक-संबंधी कविताओं का संग्रह किया गया है।

सबद17

सत जुग पैली सायबा

सिद्ध संत कूंपोजी

गुरु बिन कौन मिटावै भवदुख

परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द

गुरु रूप तणौं दरबार

आत्माराम 'रामस्नेही संत'

हिंयाळी हांसोजी परगट्या

सिद्ध संत कूंपोजी

कूंपा सिंवरो कायमा

सिद्ध संत कूंपोजी

तब हम हरि गुण गावेंगे

हरिदास निरंजनी

गुरु रूप हमारा दाता हो

आत्माराम 'रामस्नेही संत'