बाप पर कवितावां

पारिवारिक इकाई में पिता

एक विशिष्ट भूमिका का निर्वाह करता है और यही कारण है कि जीवन-प्रसंगों की अभिव्यक्ति में वह एक मज़बूत टेक की तरह अपनी उपस्थिति जताता रहता है। यहाँ प्रस्तुत है—पिता विषयक कविताओं का एक विशेष संकलन।

कविता101

वो झुरै

अर्जुनदेव चारण

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

ओ गांव है

रामस्वरूप किसान

बडेरा

रचना शेखावत

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

जांवता हा

सत्यदीप ‘अपनत्व’

निरवाळा रंग

राजूराम बिजारणियां

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

पिताजी-२

ओम पुरोहित ‘कागद’

पुळ

मनमीत सोनी

रेत

विप्लव व्यास

माटी रो सीर

ओम अंकुर

म्हारौ भगवान

पवन सिहाग 'अनाम'

म्हारा बाप

तेजसिंह जोधा

कीकर है मां?

शंकरसिंह राजपुरोहित

बाबो

भगवान सैनी

बाऊ-सा!

मणि मधुकर

अजै बांचणौ है सो-कीं

गौरीशंकर निमिवाळ

म्हैं चिड़ी मांडूं

गौरीशंकर निमिवाळ

कुण सुणै

वाज़िद हसन काजी

राजा

भगवती प्रसाद चौधरी

पिताजी

ओम पुरोहित ‘कागद’

आओ बेटी बचावां

रचना शेखावत

झमकू

श्याम महर्षि

हाइकू

शिव शर्मा 'विश्वासु'

बाप

पुरुषोत्तम छंगाणी

फोड़ो

जगदीश गिरी

पिता

निर्मला राठौड़

पिता थे

सन्तोष मायामोहन

पांगळौ

राणुसिंह राजपुरोहित

माथे पर चांद

प्रियंका भारद्वाज

मां

सत्येंद्र चारण

छपरो

पवन सिहाग 'अनाम'

खुद रै मायंता री

राजेन्द्र सिंह चारण

पण बापू

आशीष पुरोहित

म्हारा पिताजी

गौरीशंकर निमिवाळ

बेटी

मनोज कुमार स्वामी

गमग्या कठै पिताजी

कैलाश मंडेला

मायत

पवन सिहाग 'अनाम'

संतान रो सुख

कान्ह महर्षि

हाइकु

घनश्याम नाथ कच्छावा

मत करजे चूंकारो बापू

गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

बाबुल

नीलम शर्मा ‘नीलू’