बाप पर कवितावां

पारिवारिक इकाई में पिता

एक विशिष्ट भूमिका का निर्वाह करता है और यही कारण है कि जीवन-प्रसंगों की अभिव्यक्ति में वह एक मज़बूत टेक की तरह अपनी उपस्थिति जताता रहता है। यहाँ प्रस्तुत है—पिता विषयक कविताओं का एक विशेष संकलन।

कविता108

वो झुरै

अर्जुनदेव चारण

ओ गांव है

रामस्वरूप किसान

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

जांवता हा

सत्यदीप ‘अपनत्व’

निरवाळा रंग

राजूराम बिजारणियां

बडेरा

रचना शेखावत

सातवौं फेरौ

अर्जुनदेव चारण

मायत

पवन सिहाग 'अनाम'

पिताजी-२

ओम पुरोहित ‘कागद’

तंगी

नीरज दइया

अगन

बी.एल. सावन

पुळ

मनमीत सोनी

मां

सत्येंद्र चारण

छपरो

पवन सिहाग 'अनाम'

संतान रो सुख

कान्ह महर्षि

हाइकु

घनश्याम नाथ कच्छावा

मत करजे चूंकारो बापू

गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

बाबुल

नीलम शर्मा ‘नीलू’

जीसा - कीं चितराम

मीठेश निर्मोही

पिताजी

अंकिता पुरोहित

बेटा

अशोक कुमार दवे

पाग अर पीठ

हरदान हर्ष

तोम्बडू

शैलेन्द्र उपाध्याय

फुटपाथ पर बैठ्यै बाप रा सुपना

जितेन्द्र कुमार सोनी

घर बाबत

नीरज दइया

टाबर रा सवाल

नंद भारद्वाज

ओळ्यूं

भारती पुरोहित

माइतां

करणीदान बारहठ

रूंख रा छोडा

नीरज दइया

हिवड़ै री हूक

विवेकदीप बौद्ध

बापु नो आदमी

सतीश आचार्य

बापू

कुलदीप पारीक 'दीप'

बाबू सा थारा आँगणा

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'

चोखो भाई चोखो

हरसुख धायल

पिताजी

मनमीत सोनी

वेचाई ग्यौ छांइलो

राजेश जैन ‘राज’

सियाळौ

मीठेश निर्मोही

म्हारा कंवर सा

कल्याणसिंह राजावत

हाड़ी बाढतां

सत्यनारायण सोनी

सांची पूछौ तौ

कुन्दन माली

पागड़ी

अशोक परिहार 'उदय'

मा री पीड़

नमामीशंकर आचार्य