मरुथळ पर कवितावां

रेगिस्तान ऐसा शुष्क

भू-दृश्य है, जहाँ उच्च और निम्न तापमान की चरम स्थिति पाई जाती है और वनस्पति विरल होती है। अपनी इस अद्वितीयता के कारण रेगिस्तान विशिष्ट जीवन-शैली और संस्कृति को अवसर देते हैं। प्रस्तुत चयन में भारतीय रेगिस्तान के जीवन, संस्कृति और जीवनानुभवों पर अभिव्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता102

तिस सूं नीं मरै’ला

नवनीत पाण्डे

सवाल रेखागणित रो

चेतन स्वामी

धोरै री ढाळ माथै भासा

आईदान सिंह भाटी

जैसलमेर

चंद्रशेखर अरोड़ा

हूं लकू

राजेश जैन ‘राज’

मुरधर रा मुक्तक

संतोष कुमार पारीक

पिलूंदी

पूनमचंद गोदारा

तिस

नवनीत पाण्डे

ओ रोळ राज रो डंडो...

विनोद सारस्वत

पगडंडी

राजेन्द्र जोशी

किरसाण-जुवान

रतना ‘राहगीर’

कविता पेटै चिंता

शंकरसिंह राजपुरोहित

मुरधर केवै

घनश्याम लाल रांकावत

मरुथळ रो मरम

प्रहलादराय पारीक

जूंनौ तरवर

रेवतदान चारण कल्पित

बेकळू

राजेन्द्र जोशी

मुरधर देश महान

मोहनराम गोदारा

सावण

सुनील कुमार लोहमरोड़ ‘सोनू’

कियां भागतो काळ

राजेश कुमार व्यास

हैलो राजस्थानी रो

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

रेत सूं सवाल

ऋतु शर्मा

रेत में सरजीवण आस

प्रेमलता सोनी

म्हे परेम करियो

दिनेश चारण

बादळी

रामाराम चौधरी

तळौ: तळियै दिखै न तोय

भंवरलाल सुथार

मरूथळ री माटी

फारूक़ आफरीदी

मेट आरत मेह कर

गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

मरवण

नीलम पारीक

बदळाव

प्रेमलता सोनी

बादळ

दुष्यन्त जोशी

बिस्वास राखजे

प्रहलादराय पारीक

कद अेकलो ऊभो हूँ

संदीप 'निर्भय'

जग चावौ मरुधरियौ

अमर सिंह राजपुरोहित

मोर मुकुट थारो

सन्तोष मायामोहन

रेत

मईनुदीन कोहरी 'नाचीज'

गवाळियो

प्रकाशदान चारण

कविता कोरी रेत री

सत्यनारायण सोनी

रेत

कन्हैयालाल भाटी

म्हारो सांवरियो

इरशाद अज़ीज़

रेत में सरजीवण आस

प्रेम शर्मा

जेठ

रेवतदान चारण कल्पित

चंदो

चैन सिंह शेखावत

बणाव

देवकरण जोशी 'दीपक'

आपां री प्रीत

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

छप्पनियां हेला

जनकराज पारीक

काल-दुकाल

तेजाराम विश्नोई