मरुथळ पर कवितावां

रेगिस्तान ऐसा शुष्क

भू-दृश्य है, जहाँ उच्च और निम्न तापमान की चरम स्थिति पाई जाती है और वनस्पति विरल होती है। अपनी इस अद्वितीयता के कारण रेगिस्तान विशिष्ट जीवन-शैली और संस्कृति को अवसर देते हैं। प्रस्तुत चयन में भारतीय रेगिस्तान के जीवन, संस्कृति और जीवनानुभवों पर अभिव्यक्त कविताओं का संकलन किया गया है।

कविता121

धोरै री ढाळ माथै भासा

आईदान सिंह भाटी

तिस सूं नीं मरै’ला

नवनीत पाण्डे

सवाल रेखागणित रो

चेतन स्वामी

मिरग तिसणा

वाज़िद हसन काजी

जेठ में

गोरधन सिंह शेखावत

पोह

रेवतदान चारण कल्पित

खींपड़ो

सत्येंद्र चारण

उडीक

इरशाद अज़ीज़

रगताभ रोहीड़ो

प्रकाशदान चारण

जाळ

रतन ‘राहगीर’

मरुधर महिमा

कृष्णपाल सिंह राखी

डांडी सूं अणजाण

सतीश छिम्पा

मतीरो

भगवती पुरोहित

मरुधर

शिव 'मृदुल'

म्हारो सुपनों

नरेंद्र व्यास

थारो नाम

रेवंत दान बारहठ

मरु भौम रौ म्हैल

भंवरलाल सुथार

दस दात : 2. ऊँट

नानूराम संस्कर्ता

जैसलमेर

चंद्रशेखर अरोड़ा

हूं लकू

राजेश जैन ‘राज’

मुरधर रा मुक्तक

संतोष कुमार पारीक

पिलूंदी

पूनमचंद गोदारा

तिस

नवनीत पाण्डे

ओ रोळ राज रो डंडो...

विनोद सारस्वत

पगडंडी

राजेन्द्र जोशी

किरसाण-जुवान

रतन ‘राहगीर’

कविता पेटै चिंता

शंकरसिंह राजपुरोहित

ओरण

सत्येंद्र चारण

मुरधर केवै

घनश्याम लाल रांकावत

मरुथळ रो मरम

प्रहलादराय पारीक

जूंनौ तरवर

रेवतदान चारण कल्पित

बेकळू

राजेन्द्र जोशी

नैणां भरल्यूं रंग

जितेन्द्र कुमार सोनी

मुरधर देश महान

मोहनराम गोदारा

बिस्वास राखजे

प्रहलादराय पारीक

कद अेकलो ऊभो हूँ

संदीप 'निर्भय'

जग चावौ मरुधरियौ

अमर सिंह राजपुरोहित

मोर मुकुट थारो

सन्तोष मायामोहन

रेत

मईनुदीन कोहरी 'नाचीज'

गवाळियो

प्रकाशदान चारण

कविता कोरी रेत री

सत्यनारायण सोनी

रेत

कन्हैयालाल भाटी

म्हारो सांवरियो

इरशाद अज़ीज़

रेत में सरजीवण आस

प्रेम शर्मा

जेठ

रेवतदान चारण कल्पित