टाबर पर कवितावां

हिंदी के कई कवियों ने

बच्चों के वर्तमान को संसार के भविष्य के लिए समझने की कोशिश की है। प्रस्तुत चयन में ऐसे ही कवियों की कविताएँ संकलित हैं। इन कविताओं में बाल-मन और स्वप्न उपस्थित है।

कविता106

आजादी अर सपना

अर्जुनदेव चारण

चानणो

अंजु कल्याणवत

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

मजूर रौ दिन

अर्जुनदेव चारण

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

चाँद मामो

हरीश हैरी

प्रीत, छांट अर गड़ा

राजूराम बिजारणियां

थळी रा संस्कार

राजूराम बिजारणियां

संतान रो सुख

कान्ह महर्षि

ईसकौ

येवजेनी येवतुरोंक

चिराळी री गूंज

चन्द्र प्रकाश देवल

टाबर

जितेन्द्र कुमार सोनी

पाग अर पीठ

हरदान हर्ष

थारी हूंस रा मारग

अर्जुनदेव चारण

लोभ

प्रेमजी ‘प्रेम’

थूं जद

सुरेन्द्र सुन्दरम

कोट-दरवाजो

रामनाथ व्यास ‘परिकर’

मां

अंकिता पुरोहित

पोसाळ

श्याम महर्षि

दो दांतां पै

विष्णु विश्वास

बाळक

जितेन्द्र निर्मोही

भगवान मदत करता

भगवान सैनी

मेळो

शंकर दान चारण

आपो औलख

विश्वम्भरप्रसाद शर्मा ‘विद्यार्थी’

बस्तो

जितेन्द्र निर्मोही

रेत में खेलबो

अखिलेश 'अखिल'

बाळपणों

अजय कुमार सोनी

काल अर आज

ज़ेबा रशीद

क्यूं याद आवै

राणुसिंह राजपुरोहित

मंड्यो मगरियो

भगवान सैनी

बाळकियौ

मणि मधुकर

बगदबो चाहूं

देवेश पथ सारिया

इसपताऴ री नरस बावऴी...

गौरीशंकर ‘भावुक’

कांच री आस्था

रचना शेखावत

बस तणी

कमल रंगा

बाळक री मुळकाण

रामसिंह सोलंकी

पिता

निर्मला राठौड़

ऊँघ भरी छ खेत क

गौरीशंकर 'कमलेश'

ईस्कूलीया

अनुज श्रीमाली ‘भाल कवि’

चांद

मनमीत सोनी

टपक-टपक

भगवान सैनी

सुणो भगवान..!

मंजू किशोर 'रश्मि'