पद10 काहु सुं प्रीति न कीजइ नेमि काहे कुं दुख दीनउ हो मो पइ कठिन वियोग की सखी री घोर घटा घहराइ सखी री चंदन दूरि निवारि
संवैया छंद5 अधम न करि मांन मांन कीयै व्है है हांन जैसै अंजुरी कौ नीर कोउ गहै नर धीर तेरी अल्प आयु तूं तो खेलता है डाव माया जोरिबै कुं जीव तलफत है अतीव यौ तौ है संसार सविकार कछु सार नहीं
कवित्त10 कवित्त (छप्पय) काहेकुं मित्त ज्युं प्रीति न पाळत गोरउ सउ गात रसीली सी बात जाके आछे तीछे नयण लोयण भरि निरखंत