जोवन ज्युं नदी नीर जात काहु सुं प्रीति न कीजइ खोजइ कहा निरंजन वोरे मो पइ कठिन वियोग की नेमि काहे कुं दुख दीनउ हो पावस विरहिणी न सुहाइ पियाजी आइ मिलउ इक वेर सखी री चंदन दूरि निवारि सखी री घोर घटा घहराइ ऊठि कहा सोइ रह्यउ