जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’
ख्यातनांव जैन कवि। राजस्थानी अर गुजराती दोन्यूँ भासा रा जाणकार।
ख्यातनांव जैन कवि। राजस्थानी अर गुजराती दोन्यूँ भासा रा जाणकार।
चिति मिलवा री चाह
दीह दुहेलौ जाइ
देखि सुरंगी डाळ
धन पारेवां प्रीति
अेक पखीणि अंग
कांइ करै अणराय
कामण सयणां कीध
करी मन धीर करीर
केहौ कीजै दु:ख
मन मिलियौ सयणांह
नयणे मिलसै नैण
सज्जन तो कारण सदा
साजन गया सम्बाहि
साजनियां संसार
सयणे न लही सार
सुगुणै सैण कियोह
सूतां सुपनै आई
तन धन जोवन ताकतां
तूं बीछड़ियौ त्यार
वाइस उडी बलाइ ल्युं