ए बेरूपिया—नेता
कदे हल—हथोड़ा
हाथै झेले
कदेई बणै छाताधारी
कदै अल्लारी गाय बणै
कदै सांड सूर जी रो
कदै सेर कदै सवा सेर
कदै चढ़ै हाथी ऊंटा
कदै करै गधा-सवारी
राज री झेले लगाम
नै देस नै मेले मेले
जनता नै गंगाजी घालै
खुद री रोटी नीचै खीरा घालै
पोते रो पापड़ पेली सेके
हाथै नीं जीव उणरो।
आ ग्हारे हाथ री बात कोनी
जनता रै हाथ री बात
इण हाथां बिना—
नीं हल चालै
नीं हथौड़ो
नीं छतरी तणीजै
नीं रिक्छा व्है
ओ वो हाथ है—
जिण चर्खी नै
सुदरशण धारीयो
अंगरेजा सूं असहयोग की नो
अे उण बदों रा हाथ
जिणा मायड़ भौम रा बंध काटियां
जिण भाखरा जेड़ा बांध बणाया
अर संविधान माथै सही करी
इण खातर—
नीं जात माथै
नीं पांत माथै
‘ई’ इज बात माथै
हाथ रो साथ कूतै
हथां री खाज हाथै भागैं
घणां हाथो रो काम
घणां हाथ सूं व्है
माथां रै हाथ दिया
काम नीं सरै
नैणां पर हाथ रो
छाजो किया
दीसे दूर-देसावर
एक हाथ री बात नीं
देस री जनता हाथै झेले
तो कोई मोटी रात नीं
आगे आगे हाथ लामा
जागता पेली ताकता भामा
अब तो उण सूं रीजो आगा
हवन करतां हाथ बळिया
नै होला ई ढलियां
पण हाल तांई—
हाथ सूं हाथ नीं दीसै
हाथ सूं हाथ नीं बडीजै
लोग हाथ सूं खाया पतीजै
थथोधा सूं जन-मन नी रंजे
जनता घर री घिणीयाणा
पण हाथ नीं पैंडे रो पाणी
कठै हाथ री बात
कठै वीती रात?