आस पर कवितावां

कविता171

डंकै री चोट

जयनारायण व्यास

तूं

सत्य पी. गंगानगर

उजास उडीक

रेवंत दान बारहठ

शाश्वत परेम

कासिम अली

मिनख बापड़ो

मेघराज मुकुल

वां रै खातर

योगेश व्यास राजस्थानी

मिनख री छायां

त्रिभुवन

जीवण

तारा ‘प्रीत’

रोज़ेदार

सत्य पी. गंगानगर

मून मारै चिरळाटी

आनंद पुरोहित 'मस्ताना'

कांईं ठां

विक्रमसिंह गून्दोज

सब राजी खुसी छ

कृष्णा कुमारी ‘कमसिन’

चालतोई चाल

वासु आचार्य

चाल म्हारा चरखा घर रर घर

भौमराज भंवीरू ‘मंगल’

अेक दीवौ

सांवर दइया

सबद चित्राम

अब्दुल वहीद कमल

लावौ दौ माचिस

पारस अरोड़ा

तसवीर नी बोले

कैलाश मंडेला

कविता रो मारग

गजेन्द्र कंवर चम्पावत

जीवण-जोत

सत्यप्रकाश जोशी

हेलौ

सांवतराम कासणिया ‘प्रेमी’

लूण रो खार

मीठालाल खत्री

सावचेत जे रहतौ

अस्त अली खां मलकांण

औ बिजौगण

अस्त अली खां मलकांण

लाख जतन कर हारी

सीताराम महर्षि

तूं आइजै

सांवर दइया

नुवों नुवों परभात रै

कुंदन सिंह 'सजल'

अमोघ ओखध

मगर चन्द्र दवे

चिंता नीं करणी

नगेन्द्र नारायण किराडू

कांई लेयगी

आशीष पुरोहित

आदमी नै बईरु

दीपिका दीक्षित

अमरबेल मिनख

सुधीन्द्र कुमार ‘सुधि’

तिरस

रचना शेखावत

मनकासार

दीपिका दीक्षित

सुतन्तर नागरिक

कमर मेवाड़ी

डाक्टर

कैलाश मंडेला

सरबनास रो निरत

सुब्रह्मण्य भारती

जका बखत नै सैसी

वासु आचार्य

थारी निजरां

हरीश सुवासिया

कविता

कैलाश मंडेला

अर खाक हो जाऊंगो म्हूं

हेमन्त गुप्ता पंकज

हिवड़ै रा गीत

दीपचन्द सुथार

पांगळा भाई

गोरधन सिंह शेखावत