आस पर ग़ज़ल

ग़ज़ल14

दीवा फेर जगाणा पड़सी!

राजेंद्र स्वर्णकार

थां सिरजो चितराम

सवाई सिंह शेखावत

गजल रै मांय लाय राखूंला

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

कठै-कठै

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

मरुवो

सत्य पी. गंगानगर

फूंक दे, फूंक! आग चेतेगा

पुष्कर 'गुप्तेश्वर'