(1)
हेली! जीवण-राग पहेली।
जिण में संग चलै नीं धेली॥
भेळो करतां कोडी-कोडी
ऊमर ढळगी, गळगी गोडी
अब तो मन में चेत निगोड़ी।
अण हद खाई-खेली।
हेली! जीवण-राग पहेली॥
मोह माया मद रेतां रळसी
मोतड़ली कद टाळी टळसी
आयो जीं नै जाणो पड़सी
कुछ आगै या पै’ली।
हेली! जीवण-राग पहेली॥
घूम रयो जग जीवण गेड़ो
ईं में कुछ नेड़ो, कुछ छेड़ो
पार लगाणो पड़सी गेड़ो
खुद नै खुद रो गैलो।
हेली! जीवण-राग पहेली॥
(2)
हेली! च्यार घड़ी चोमासो।
बाकी सूखो बा’रा मासो॥
मौसम रो मिज्जाज मिजाजण।
है सुर बदलू साज मिजाजण।
जूवै जीवण-राग मिजाजण।
पलट्यां सरसी पासो।
हेली! च्यार घड़ी चोमासो॥
चलतो चाक अटकणो कोनी
बीत्यो बखत पलटणो कोनी
सांसो कदै सलटणो कोनी
सलट्यां सरसी सांसो।
हेली! च्यार घड़ी चोमासो।
चाँद चढ्यो गिगनार अटारी
बीत्यां पाछै रुत बिणजारी।
कंवळी-काया केसर क्यारी
पड़सी रूप कळांसो
हेली! च्यार घड़ी चोमासो॥