टैम पै मोर आबो, टैम पै फूल अर टैम पै फळ आबो
आंबा, लीमू, नारंग्यां, कटैळ कै।
तो फेर आपां की अक्कल बांझड़ी ई रैहगी?
आपां न ले पावां पाकी बुद्धि का फळ?
या कस्यां होगी? या क्यूंकर होगी?
पाणी नै अमरत बणावै बांध की भीत्यां,
जमीं नै हरी करै बंधी नद्यां,
तो फेर आपां ई रहां बना बन्धन का?
आपांई रहां बना नाथ का?
या कस्यां होगी? या क्यूंकर होगी?
नूई-नूई सरस्टि रचबां में चत मन सूं
लाग रह्या छै करोड़ां हाथ-पांव
अर आंपण ईं असारा सूं समझा रह्या छै,
अर आपण आळस अर बना काम पड़्यां छां छाना मूंना।
या कस्यां होगी? या क्यूंकर होगी?
भौम का भोगांई छ्यारूं मेर सूं समेट्यां छां
आपणो ग्यान गधा केळ करबा लागग्यो
तन पै सूंना की चमक अर मन में अंधारो
कंवल की नांईं आंख्यां खुली बारै सूं
अर भीतर की आंख्यां नपटई मच री छै
या कस्यां होगी? या क्यूंकर होगी?
घणां-सूं घणो कुसळ-खेम।
घणा-सूं घणो सुभ-लाभ,
अर घणां-सूं घणी चेतना की चमक
हूंस कर’र आपां अेकठा करां छोटा-सा घेरा में
क्यूं? अेकला राजी-खुसी जील्यां सो बरस!
या कस्यां होगी? या क्यूंकर होगी?