दुख पर कवितावां

कविता265

सबदां री हद रै मांय

आईदान सिंह भाटी

भूख रौ रूंख

विक्रमसिंह गून्दोज

हिज्र

सत्य पी. गंगानगर

अबूलेंस

देवीलाल महिया

दीठ रो फरक

आरती छंगाणी

तूं

सत्य पी. गंगानगर

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

यक्ष सवाल

रेवंत दान बारहठ

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

धरती री मुळक

रमेश मयंक

जे थै अगन हौ

मुलदागालीयेव

आपरा आलोचकां सूं

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

गंदी हवा

चंद्रशेखर अरोड़ा

आंकड़ा का फूल

प्रेमजी ‘प्रेम’

बाप री ठौर

हरदान हर्ष

हेलो

अशोक परिहार 'उदय'

दरद रा डूँगर

नन्दकिशोर चतुर्वेदी

तसवीर नी बोले

कैलाश मंडेला

नसो

निरंजन सिंह निर्मल

पाप-बोध

सत्यप्रकाश जोशी

दादीसा ढापा ढकै

हरदान हर्ष

सावचेत जे रहतौ

अस्त अली खां मलकांण

अब जाणै नीं देखणौ पड़ै

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी

औ बिजौगण

अस्त अली खां मलकांण

प्रीत री जेवड़ी

कृष्णा जाखड़

हे! हरियाळा रूंखड़ा

कमल सिंह सुल्ताना

अमूझणी भर्‌या दिन

भगवती लाल व्यास

थारी जरूरत कोनी

देवीलाल महिया

ओ कांई ढाळो है देस रो

सत्येंद्र चारण

हलाल रो मांस

गोरधन सिंह शेखावत

चालतोई चाल

वासु आचार्य

पांगळी

मणि मधुकर

थे

रूपसिंह राठौड़

म्हारी मां अजै है

मीठालाल खत्री

राणी पदमणी

मेघराज मुकुल

नित-नेम

हरीश भादानी

धारावी

जितेन्द्र कुमार सोनी

जोग

मणि मधुकर

नुसखौ

चन्द्र प्रकाश देवल

बापड़ो बी.बी.

बरतोल्त ब्रैख्त

अमोघ ओखध

मगर चन्द्र दवे

सायबा घर आया

भागीरथसिंह भाग्य

दूजी पीड़ मुलावै

सीताराम महर्षि