दुख पर कवितावां

कविता223

सबदां री हद रै मांय

आईदान सिंह भाटी

हिज्र

सत्य पी. गंगानगर

अबूलेंस

देवीलाल महिया

तूं

सत्य पी. गंगानगर

बंटवारो

भगवती लाल व्यास

भूख रौ रूंख

विक्रमसिंह गून्दोज

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

नुसखौ

चन्द्र प्रकाश देवल

अमोघ ओखध

मगर चन्द्र दवे

सायबा घर आया

भागीरथसिंह भाग्य

दूजी पीड़ मुलावै

सीताराम महर्षि

पका तिरस नै

रेणुका व्यास 'नीलम'

मन री पीड़ा मन में पाची

संतोष कुमार पारीक

परवाणां

ज़ेबा रशीद

मन नै मारण रो उपाव

प्रिया शर्मा

सरप री सांकळ

मणि मधुकर

मनकासार

दीपिका दीक्षित

दुःख

खेतदान

आसमान

जितेन्द्र कुमार सोनी

गाम री खोज

सतीश छिम्पा

दुख क्यूं व्है ?

जुगल परिहार

पांगळा भाई

गोरधन सिंह शेखावत

दोय घंट

दीपचन्द सुथार

बिरह

अनीता सैनी ‘दीप्ति'

पांडुलिपि

महेन्द्र भानावत

मानखो

संजू श्रीमाली

संकळप सूरज

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

प्रीत रै आंगणै

बंशी यथार्थ

मोह

सत्य पी. गंगानगर

स्यात

सुरेश जोशी

दुख

दुष्यन्त जोशी

दीठ

अर्जुनसिंह शेखावत

अन्तर सद्

दीनदयाल ओझा

मन री बातां

मेघराज मुकुल

बडा आदमी

प्रदीप भट्ट

चोरी करी पण मै चोर कोनी

अवन्तिका तूनवाल

दोजक

बंशी यथार्थ

आग रा छांटा

त्रिभुवन

बुणगट

भगवती लाल व्यास

म्हारी डायरी

प्रमिला शंकर

दुख रो कारण

राजकुमारी पारीक

कदर

भोगीलाल पाटीदार

पगरखी

भगवती लाल व्यास

बेटी री पीड़

छैलूदान चारण 'छैल'

सुखसाज

मणि मधुकर