जमारो

घणकरो सो

आल बातां में बितायो

पराई निंदा

अर

ईरखा में चाल अर

का चुगली कर’र

मन में उमायो।

कदै कदै जाड़ पीसी

बूकिया ऊंचा चढ़ाया

राड़ आडी बाड़ दे

लांपो लगायो।

इण रै बाद भूखै उदर

ऊकळतै आद्यण में

भंडारो ऊर

बळध ज्यूं

सूंसाट करतो

खाय सोयो

समझ नहीं सक्यो

इण जमारै में

कंई पायो कंई खोयो।

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : मार्च, अंक 13
जुड़्योड़ा विसै