मांगण री मंगता रै, करमां में रेख क्यूं?

पूछांला परभूजी नै, लिखिया अै लेख क्यू?

खोसनै कद खायौ, लूटनै कद लायौ

मुळकौ मुसकावौ हौ, म्हां सामी देख क्यूं?

सुगणां नै समझूं तौ जुलमां सूं नी जूझै,

नुगरां नै नालायक, होग्या है अेक क्यूं?

सौ-सौ सदगुण है पण औगण है अेक अजब,

सुवरण री चौकी में मारी है मेख क्यूं?

किरपा जो करणी व्है घर में घुस मून धरौ

साधू नै नेतावां रा धारौ हो भेख क्यूं?

ईश्वर नै अल्ला में ‘लाल’ भेद नी राखै,

मन्दिर में आया हौ तौ, सरमावौ सेख क्यू?

स्रोत
  • पोथी : जागती-जोत ,
  • सिरजक : लालदास ‘राकेश’ ,
  • संपादक : कन्हैयालाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : सितम्बर, अंक 07
जुड़्योड़ा विसै