प्रतिरोध पर कवितावां

आधुनिक कविता ने प्रतिरोध

को बुनियादी कर्तव्य की तरह बरता है। यह प्रतिरोध उस प्रत्येक प्रवृत्ति और स्थिति के विरुद्ध मुखर रहा है, जो मानव-जीवन और गरिमा की आदर्श स्थितियों और मूल्यों पर आघात करती हो। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतिरोध विषयक कविताओं का एक व्यापक और विशिष्ट चयन।

कविता206

औ कुण आयो, औ कुण आयो?

आईदान सिंह भाटी

इंकलाब री आँधी

रेवतदान चारण कल्पित

आ जन कवि री जुग वांणी

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

रोयां रुजगार मिळै कोनीं

रेवतदान चारण कल्पित

आजादी री जीत कठै है

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

कविता नै फांसी

कन्हैयालाल सेठिया

नैनी कवितावां

ओंकार श्री

संकल्प

बी एल पारस

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

पगफेरौ

मणि मधुकर

बरसगांठ

रेवतदान चारण कल्पित

म्हनै लिखणौ नीं आवै

पवन सिहाग 'अनाम'

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

चेत मांनखा

रेवतदान चारण कल्पित

हूं इण गीतां नैं सुणतो रयो

व्लादिमिर किरीलोव

थै जाणो हो

सांवर दइया

अडोळौ उच्छब

रेवतदान चारण कल्पित

जाजम रै खिलाफ

अर्जुनदेव चारण

बंदा मैणत री जै बोल

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

ओळबौ

चन्द्र प्रकाश देवल

मीरां

अर्जुनदेव चारण

लड़ाई सूं पैली

अर्जुनदेव चारण

उछाळौ

रेवतदान चारण कल्पित

करां कांई

चन्द्र प्रकाश देवल

पौथी थारी

पवन सिहाग 'अनाम'

बहुवचन

चन्द्र प्रकाश देवल

कवी

सर्गेइ येसेनिन

रूसी गदर रै नांव

वेलेरी बर्‌यूजोव

भासा

हेमन्त शेष

मोटो खड़ाणो

मोहन आलोक

उच्छब

मणि मधुकर

मैं बागी तो कोनी होयग्यो के

किशोर कल्पनाकान्त

दिवलौ

रघुराजसिंह हाड़ा

बखत

गोरधन सिंह शेखावत

कीरत रा कमठाण

प्रकाशदान चारण

मिनख

अनिला राखेचा

भावी रौ भणकारौ

शंकरसिंह राजपुरोहित

अचरज

पारस अरोड़ा

ओळखाण

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'

जळ फकत जळ नीं है : सबद

बी. एल. माली ‘अशान्त’

लाय

प्रेमजी ‘प्रेम’

घास

कार्ल सैंडबर्ग

निजारौ

मणि मधुकर