प्रतिरोध पर कवितावां

आधुनिक कविता ने प्रतिरोध

को बुनियादी कर्तव्य की तरह बरता है। यह प्रतिरोध उस प्रत्येक प्रवृत्ति और स्थिति के विरुद्ध मुखर रहा है, जो मानव-जीवन और गरिमा की आदर्श स्थितियों और मूल्यों पर आघात करती हो। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतिरोध विषयक कविताओं का एक व्यापक और विशिष्ट चयन।

कविता199

औ कुण आयो, औ कुण आयो?

आईदान सिंह भाटी

इंकलाब री आँधी

रेवतदान चारण कल्पित

आ जन कवि री जुग वांणी

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

आजादी री जीत कठै है

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

रोयां रुजगार मिळै कोनीं

रेवतदान चारण कल्पित

संकल्प

बी एल पारस

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

कविता नै फांसी

कन्हैयालाल सेठिया

नैनी कवितावां

ओंकार श्री

म्हनै लिखणौ नीं आवै

पवन सिहाग 'अनाम'

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

चेत मांनखा

रेवतदान चारण कल्पित

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

हूं इण गीतां नैं सुणतो रयो

व्लादिमिर किरीलोव

थै जाणो हो

सांवर दइया

अडोळौ उच्छब

रेवतदान चारण कल्पित

सफदर हासमी री मौत

गोरधन सिंह शेखावत

आगै अंधारौ

नंद भारद्वाज

चेतावणी

चैनसिंह परिहार

डर

उम्मेद गोठवाल

उडीक

पारस अरोड़ा

जन जन रै मन हेत चाहीजै

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

आखड़ी

अर्जुनदेव चारण

कविता अेक फकीरी

आईदान सिंह भाटी

बांध पगां में घूघरा

त्रिलोक शर्मा

जिग्यां

उम्मेद गोठवाल

सिरोळी सांयत

चन्द्र प्रकाश देवल

सेयर बाजार

अर्जुनदेव चारण

मुट्ठी

गोरधन सिंह शेखावत

गरीब की जोरू

गोविन्द हाँकला

खिलाफ

उम्मेद गोठवाल

रंगरूट

पवन सिहाग 'अनाम'

हिसाब री वसूली

अर्जुनदेव चारण

टाबर रा सवाल

नंद भारद्वाज

कदमताळ

गोरधन सिंह शेखावत

ऊंडी भखारियां

अर्जुनदेव चारण

अजै जूझणो पड़सी

मोहम्मद सदीक

दूजौ

मणि मधुकर

बोध

प्रेमजी ‘प्रेम’

अहिंसा

चन्द्र प्रकाश देवल

घणी खम्मां

मणि मधुकर

इतिहास री अबखी है चाल

राजेन्द्र बोहरा