प्रतिरोध पर कवितावां

आधुनिक कविता ने प्रतिरोध

को बुनियादी कर्तव्य की तरह बरता है। यह प्रतिरोध उस प्रत्येक प्रवृत्ति और स्थिति के विरुद्ध मुखर रहा है, जो मानव-जीवन और गरिमा की आदर्श स्थितियों और मूल्यों पर आघात करती हो। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतिरोध विषयक कविताओं का एक व्यापक और विशिष्ट चयन।

कविता228

औ कुण आयो, औ कुण आयो?

आईदान सिंह भाटी

इंकलाब री आँधी

रेवतदान चारण कल्पित

आजादी री जीत कठै है

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

रोयां रुजगार मिळै कोनीं

रेवतदान चारण कल्पित

आ जन कवि री जुग वांणी

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

चेत मांनखा

रेवतदान चारण कल्पित

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

कविता नै फांसी

कन्हैयालाल सेठिया

नैनी कवितावां

ओंकार श्री

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

म्हैं अन्नदाता कोनी

रामस्वरूप किसान

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

संकल्प

बी एल पारस

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

पगफेरौ

मणि मधुकर

बरसगांठ

रेवतदान चारण कल्पित

म्हनै लिखणौ नीं आवै

पवन सिहाग 'अनाम'

मास्को सिम्फनी

नाजिम हिकमत

क्रान्ति

किशोर कल्पनाकान्त

मायकोव्हस्की रो तमंचो

येवेजनी येव्तुसेंको

कांई करां हजूर!

चन्द्र प्रकाश देवल

आज़ादी

पवन सिहाग 'अनाम'

जद तूटै अंबर सूं तारौ

रेवतदान चारण कल्पित

बगावत

रेवतदान चारण कल्पित

मांनी जता मिनख

चंद्रशेखर अरोड़ा

मत जा साथी

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

अै सवाल

ओंकार श्री

कठै सूं ऊपजै आ आग

हरीश भादानी

जात

उम्मेद गोठवाल

आग रा छांटा

त्रिभुवन

चोरी

पारस अरोड़ा

एकलो हाथ

भगवती लाल व्यास

‘आ’ किण रै तांईं

व्लादिमीर मायकोव्स्की

बीघोड़ी

रेवतदान चारण कल्पित

अणगायो-गीत

किशोर कल्पनाकान्त

मूंन रौ जलमणौ

चन्द्र प्रकाश देवल

अजै जैन स्यापौ हैं

उम्मेद गोठवाल

गाम री खोज

सतीश छिम्पा

नुंवै बरस रौ दिन

माओत्से तुङ्ग

चेत मानखा चेत

मोहम्मद सदीक

आदमखोरां रै खिलाफ

नंद भारद्वाज

हक

रामकुमार भाम्भू

बिद्रोही

फ्रैंक ए. कॉलिमोर

लाचारी

मणि मधुकर

नुवौं रूप

पारस अरोड़ा

म्हांरा लिखारा

यादवेन्द्र शर्मा 'चन्द्र'