प्रतिरोध पर कवितावां

आधुनिक कविता ने प्रतिरोध

को बुनियादी कर्तव्य की तरह बरता है। यह प्रतिरोध उस प्रत्येक प्रवृत्ति और स्थिति के विरुद्ध मुखर रहा है, जो मानव-जीवन और गरिमा की आदर्श स्थितियों और मूल्यों पर आघात करती हो। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतिरोध विषयक कविताओं का एक व्यापक और विशिष्ट चयन।

कविता238

औ कुण आयो, औ कुण आयो?

आईदान सिंह भाटी

इंकलाब री आँधी

रेवतदान चारण कल्पित

आ जन कवि री जुग वांणी

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

आजादी री जीत कठै है

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

माटी थनै बोलणौ पड़सी

रेवतदान चारण कल्पित

लालू दादो

चन्द्र प्रकाश देवल

रोयां रुजगार मिळै कोनीं

रेवतदान चारण कल्पित

पगफेरौ

मणि मधुकर

बरसगांठ

रेवतदान चारण कल्पित

म्हनै लिखणौ नीं आवै

पवन सिहाग 'अनाम'

संकल्प

बी एल पारस

सूरमा

पवन सिहाग 'अनाम'

चेत मांनखा

रेवतदान चारण कल्पित

पांखी री पीड़

भगवती लाल व्यास

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

कविता नै फांसी

कन्हैयालाल सेठिया

नैनी कवितावां

ओंकार श्री

बीज नै उगणो पड़सी

भीम पांडिया

म्हैं अन्नदाता कोनी

रामस्वरूप किसान

नंग धड़ंग अरावळी

कन्हैयालाल सेठिया

जन जन रै मन हेत चाहीजै

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

आखड़ी

अर्जुनदेव चारण

कविता अेक फकीरी

आईदान सिंह भाटी

बांध पगां में घूघरा

त्रिलोक शर्मा

जिग्यां

उम्मेद गोठवाल

सिरोळी सांयत

चन्द्र प्रकाश देवल

सेयर बाजार

अर्जुनदेव चारण

मुट्ठी

गोरधन सिंह शेखावत

बुण रयी हूं अेक सरीर

गैब्रेला मिस्ट्राल

घणी खम्मां

मणि मधुकर

इतिहास री अबखी है चाल

राजेन्द्र बोहरा

हित्यारा कांईठा कुण?

लेस्ली पिंकनी हिल

म्हैं सोचूं हूं

किशोर कल्पनाकान्त

लपट

आक्टेवियो पाज़

चिराळी री गूंज

चन्द्र प्रकाश देवल

मिलिशिया री लुगायां

माओत्से तुङ्ग

बाकी हिसाब

पारस अरोड़ा

थिर विद्रोह

पारस अरोड़ा

ठठेरै री जाई

मणि मधुकर

हूं इण गीतां नैं सुणतो रयो

व्लादिमिर किरीलोव

थै जाणो हो

सांवर दइया

अडोळौ उच्छब

रेवतदान चारण कल्पित

नाग-निसरणी

शंकरसिंह राजपुरोहित

जाजम रै खिलाफ

अर्जुनदेव चारण

बंदा मैणत री जै बोल

गणेशीलाल व्यास 'उस्ताद'

ओळबौ

चन्द्र प्रकाश देवल

मीरां

अर्जुनदेव चारण