माँ पर कवितावां

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

कविता236

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

चानणो

अंजु कल्याणवत

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

हांचळ रौ हेज

सुमन बिस्सा

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

कारीगरी

राजूराम बिजारणियां

अेक रोटी

विजय राही

मायड़

महेंद्रसिंह छायण

मायत

पवन सिहाग 'अनाम'

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

गाजर रौ सीरो

अनिला राखेचा

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

बडेरा

रचना शेखावत

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

अबूलेंस

देवीलाल महिया

मा रिसाणी है

राजूराम बिजारणियां

मंगती कोनी

देवीलाल महिया

मावड़ी अर धिवड़ी

अनुश्री राठौड़

खूंटो

सुनील कुमार

कुचरणी

ओम पुरोहित ‘कागद’

रेत

विप्लव व्यास

माटी रो सीर

ओम अंकुर

रगत पीयोड़ी रज

धनंजया अमरावत

आ जमीन आपणी

कल्याणसिंह राजावत

धरती मा

भंवर कसाना

सिटल

कुमार श्याम

वंदण

रसूल हमजातोव

चेत गावड़ी

चेतन स्वामी

कीड़ी नगरो

पूनमचंद गोदारा

सवाल

वरदी चंद राव 'विचित्र'

कुण सुणै

वाज़िद हसन काजी

मा

गौरीशंकर निमिवाळ