माँ पर कवितावां

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

कविता229

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

हांचळ रौ हेज

सुमन बिस्सा

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

चानणो

अंजु कल्याणवत

मंगती कोनी

देवीलाल महिया

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

गाजर रौ सीरो

अनिला राखेचा

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

बडेरा

रचना शेखावत

अबूलेंस

देवीलाल महिया

मा रिसाणी है

राजूराम बिजारणियां

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

मावड़ी अर धिवड़ी

अनुश्री राठौड़

अेक रोटी

विजय राही

मायड़

महेंद्रसिंह छायण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

कारीगरी

राजूराम बिजारणियां

ध्वजवन्दन

कान्ह महर्षि

मा री मै'मां

रामजीलाल घोड़ेला 'भारती'

मां

चंद्रशेखर अरोड़ा

इसो बसंत खिलादै मा

लक्ष्मीनारायण रंगा

मा खातर कविता

नीरज दइया

समर्पण

अन्नाराम ‘सुदामा'

अंताखरी

सत्यप्रकाश जोशी

समझ

तुषार पारीक

मां-बेटी

ज़ेबा रशीद

मा

मनोज कुमार स्वामी

मां अर बेटो

सत्येंद्र चारण

जोगमाया

तेजस मुंगेरिया

जग चावौ मरुधरियौ

अमर सिंह राजपुरोहित

आंगण कोड मनावै

राजेश कुमार व्यास

अेको करणो पड़सी

राजेन्द्र जोशी

निजर

मनोज कुमार स्वामी

मा-बेटी

मनोज कुमार स्वामी

जळ फकत जळ नीं है : सबद

बी. एल. माली ‘अशान्त’

हित्या रौ उच्छब

अर्जुनदेव चारण

मा

भारती पुरोहित

टूटगी रिस्तां री डोर

रजा मोहम्मद खान