माँ पर कवितावां

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

कविता232

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

हांचळ रौ हेज

सुमन बिस्सा

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

चानणो

अंजु कल्याणवत

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

अेक रोटी

विजय राही

मायड़

महेंद्रसिंह छायण

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

कारीगरी

राजूराम बिजारणियां

मायत

पवन सिहाग 'अनाम'

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

गाजर रौ सीरो

अनिला राखेचा

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

बडेरा

रचना शेखावत

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

अबूलेंस

देवीलाल महिया

मा रिसाणी है

राजूराम बिजारणियां

मंगती कोनी

देवीलाल महिया

मावड़ी अर धिवड़ी

अनुश्री राठौड़

छपरो

पवन सिहाग 'अनाम'

थूं कठै है

किरण राजपुरोहित 'नितिला'

पीळो पोमचो

कृष्णा आचार्य

म्हारा पिताजी

गौरीशंकर निमिवाळ

दुःख

खेतदान

नेहचौ

चन्द्र प्रकाश देवल

मां थकी वधारै कुंण

हर्षिल पाटीदार

जूंझार

गोरधन सिंह शेखावत

मा

संजय पुरोहित

जीवणाधार

सुधा सारस्वत

मा रो परस

अजय कुमार सोनी

सपना

अर्जुनदेव चारण

मां-बाप के बेई

शरद उपाध्याय

घर

नीरज दइया

मां अर म्हैं

अंकिता पुरोहित

गळै री कंठी

कृष्णा आचार्य

मां

सत्येंद्र चारण