माँ पर कवितावां

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

कविता230

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

चानणो

अंजु कल्याणवत

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

हांचळ रौ हेज

सुमन बिस्सा

मायत

पवन सिहाग 'अनाम'

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

गाजर रौ सीरो

अनिला राखेचा

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

बडेरा

रचना शेखावत

सबद कोस

अर्जुनदेव चारण

अबूलेंस

देवीलाल महिया

मा रिसाणी है

राजूराम बिजारणियां

मंगती कोनी

देवीलाल महिया

मावड़ी अर धिवड़ी

अनुश्री राठौड़

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

कारीगरी

राजूराम बिजारणियां

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

अेक रोटी

विजय राही

मायड़

महेंद्रसिंह छायण

ध्वजवन्दन

कान्ह महर्षि

ऊंडी भखारियां

अर्जुनदेव चारण

धीयां नै

सत्यप्रकाश जोशी

हॉर्स ब्लाइंड

मनीषा आर्य सोनी

हुंस्यार है कांईं

कृष्ण कुमार स्वामी

अफसर

आशीष पुरोहित

सेयर बाजार

अर्जुनदेव चारण

रगत

भगवती प्रसाद चौधरी

अंताखरी

सत्यप्रकाश जोशी

समझ

तुषार पारीक

मां-बेटी

ज़ेबा रशीद

मा

मनोज कुमार स्वामी

मां अर बेटो

सत्येंद्र चारण

जोगमाया

तेजस मुंगेरिया

जग चावौ मरुधरियौ

अमर सिंह राजपुरोहित

आंगण कोड मनावै

राजेश कुमार व्यास