माँ पर कवितावां

किसी कवि ने ‘माँ’ शब्द

को कोई शब्द नहीं, ‘ॐ’ समान ही एक विराट-आदिम-अलौकिक ध्वनि कहा है। प्रस्तुत चयन में उन कविताओं का संकलन किया गया है, जिनमें माँ आई है—अपनी विविध छवियों, ध्वनियों और स्थितियों के साथ।

कविता227

बुगचौ

आईदान सिंह भाटी

दीठाव रै बेजा मांय

तेजसिंह जोधा

चानणो

अंजु कल्याणवत

चेतै आयगी मां

आशीष पुरोहित

प्रेम री परीभाषा

सत्येंद्र चारण

आंगणैं रो हक

राजूराम बिजारणियां

मारग

चन्द्र प्रकाश देवल

हरिया रूंख

अंजु कल्याणवत

हांचळ रौ हेज

सुमन बिस्सा

घर कठै है

अर्जुनदेव चारण

थूं कद जीवती ही मां

अर्जुनदेव चारण

कारीगरी

राजूराम बिजारणियां

जूण रा इग्यारा चितराम

सुरेन्द्र सुन्दरम

बडेरा

रचना शेखावत

मंगती कोनी

देवीलाल महिया

थारी अर म्हारी बात

आईदान सिंह भाटी

मावड़ी अर धिवड़ी

अनुश्री राठौड़

भोळी चिड़कली

चंद्रशेखर अरोड़ा

गाजर रौ सीरो

अनिला राखेचा

बेटा कद आवैला गांव

राजूराम बिजारणियां

अबूलेंस

देवीलाल महिया

मा रिसाणी है

राजूराम बिजारणियां

अेक रोटी

विजय राही

मायड़

महेंद्रसिंह छायण

रेत

विप्लव व्यास

माटी रो सीर

ओम अंकुर

रगत पीयोड़ी रज

धनंजया अमरावत

खूंटो

सुनील कुमार

जोगण! जगदंबा! जग-जाहर

महेंद्रसिंह छायण

परलै री घड़ी

अर्जुनदेव चारण

मातावां नैं अरपण

अलेक्जांदर त्वारदोवस्की

जागो और जगाओ

कल्याणसिंह राजावत

मां

मंजू किशोर 'रश्मि'

मन री चावना

मीनाक्षी बोराणा

आ जमीन आपणी

कल्याणसिंह राजावत

धरती मा

भंवर कसाना

सिटल

कुमार श्याम

चेत गावड़ी

चेतन स्वामी

कीड़ी नगरो

पूनमचंद गोदारा

सवाल

वरदी चंद राव 'विचित्र'