शंकरलाल स्वामी
राजस्थानी रा चावा कवि-लेखक।
राजस्थानी रा चावा कवि-लेखक।
आभै में घटावां कोई गा रह्यो गजल
बची-खुची पूंजी भी इब तो छीजण लागी
इब भेळा परिवार कठै है
इण आस में जीणो पड़ै संसार बदळसी
कात्यो कर्यो कपास भायला
मन में साची प्रीत अठै है
मिनख मिनख रो बैरी क्यूं है
प्रीत खुसी री खाण बिरादर
प्रीत रो दुसमण जमानो है तो है
थांरै होठां मुळक थिरकती आछी लागै
उतर्यो उतर्यो चेहरो लागै