पद्धरि छंद5 आविया सगळा सूरवीर ऊछळी समुद्रनी जाणि बेल चाल्यो लंका दिसि रांमचंद दसबदन वाई मदन भेरि सुग्रीव हनुमंत नइ सुसेण
दूहा15 गिरिकंदर मांहि जिम रही देह लाज गुण चातुरी धिग धिग जीवित तेहनो भरत बात ए सांभळी हिव राजा महुछव करइ
हरदास मीसण किशनदास जी महाराज स्वामी आत्माराम ऊदोजी अड़ींग संत सुखरामदास ओपा आढा काशी छंगाणी पृथ्वीराज राठौड़