समयसुंदर
समयसुंदर जूनैकाल रा कवि अर जैन धरमाचार्य।
समयसुंदर जूनैकाल रा कवि अर जैन धरमाचार्य।
जूनैकाल रा महताऊ कवियां अर जैन धरमाचार्यां में समयसुंदर रौ नांव घणै आदर साथै लियो जावै। समयसुंदर रौ जलम संवत 1620 रै लगैटगै सांचौर में पिता रूपसी अर माता लीलादे रै घर मांय हुयौ। वां मुनि जिनचंद्रसूरि सूं दीक्षा हासल करी अर धरम रै प्रचार मांय लागग्या। समयसुंदर आपरै जीवण में मौकळो विहार करणै रै साथै आध्यात्मिक रचनावां रौ सिरजण कर्यो। वै संस्कृति, प्राकृत, अपभ्रंस अर राजस्थानी भासावां माथै सांतरी पकड़ राखता अर आपरै जीवण में मौकळै साहित्य रौ सिरजण कर्यो। समयसुंदर संस्कृत मांय तीस रै लगटै गै अर राजस्थानी में पचास सूं बेसी रचनावां रची। इणरै साथै वां केई टीकावां, स्तवन गीत, बालावबोध अर छत्तीसी रचनावां ई आपरै जीवण मांय रची। वां री रच्योड़ी ’सीताराम चौपाई’ जैन सैली में रच्योड़ी रामकथा है जिकी जूनै काल री घणी महताऊ रचनावां में गिणीजै। समयसुंदर अहमदाबाद में संवत 1802 में चेत महिनै री सुक्ल तेरस तिथ नै देवलोक हुया। राजस्थानी साहित्य में वां रै योगदान नै हरमेस आदर्यो जासी।