समयसुंदर जूनैकाल रा कवि अर जैन धरमाचार्य।
एक दिन इंद्र कहइ इसउ
लखमण नउ अंग फरसीयो
मरणो तो पगमइं वहइं
राम नइं दीधी बधावणी