भरत बात ए सांभळी देह लाज गुण चातुरी धिग धिग जीवित तेहनो गिरिकंदर मांहि जिम रही हिव राजा महुछव करइ जोवन वय सीता तणउ कहइ सीता नइं कुशल छइं कीयउ दसूठण अनुक्रमइ कोइ वर सीता सारिखउ पंच धाइ पाळीजती रे रे किहां रावण तिको संदेसो सीता कह्यो सीतायइ धीरज धर्यो सीता रांवण अपहरी सीता सहिनाणी सुणो