लालनाथ जी Marwar जसनाथी संप्रदाय रा चावा संत कवि। आत्मानुभूति री मर्म वेदना सूं संबंधित साखियां अर पदां रा रचैता।
दूहा11 हसां तो मोती चुगै अलख पुरी अलगी रही अवल गरीबी अंग बसै ध्यानी नहीं शिव सारसा भली बुरी दोनूं तजो