लालनाथ जी
जसनाथी संप्रदाय रा चावा संत कवि। आत्मानुभूति री मर्म वेदना सूं संबंधित साखियां अर पदां रा रचैता।
जसनाथी संप्रदाय रा चावा संत कवि। आत्मानुभूति री मर्म वेदना सूं संबंधित साखियां अर पदां रा रचैता।
आम ईख नारेळ निपावो
अमाड़ी हर आप बैसैं
बुध ऊजळ लछ साहरा
दुरबळ ऊपर दया करीजै
गैरो फूल गुलाब रो
हर हर जपल्यो भोळा जीव
इंडो फोड़ आभथळ रचिया
जोत खड़ी कर जमों जगावो
जोत रतन मांहे कोई
कूवा बाय निवाण खिणाया
लालच लोभ’र कूड़ी माया
पिरथी जाणै कूड़ कपट सो
सब संसार आपदा आवट
सांवण सुरंगी बेलड़ी
सुन्न सिखर नै साधु पोंता
सुरनर अरज करै सायब नै, सुण स्वामी दाता किरतार !