जद वा आपरी पिंडलियां नै

अेक दूजी रै माथै धरै

मांस रा दोय पीळा चंदरमा उदै हुवै

उणरी हरी जुराबां रै ऊपर।

पछै वा कुरसी सूं ऊठै

अर वै पीळौ चंदरमा

काळा जळ में डूब जावै

म्हैं दरूजै तांई उणरौ लारौ करूं।

धोळी सिलावां री घाटी

अर उण माथै रपटती चांदणी,

यानी के चांदी रै झरणै में

अेक माछळी।

अबै वा म्हारी मीट नै

अेक डोरै सूं बांध'नै

आपरा सुगोळ स्तनां रै च्यारूं कानी

पळेट लेवै

अर यूं

अनेकूं जिनावरां रै बिचाळै घिर जावै।

यां धोळी सिलावां रै बीच

काळा घोड़ा अर गेंडा चरण लागै।

झरणै री चादर में

म्हैं उणनै पळेट लूं

अर वौ पाणी म्हारै में समाय जावै।

म्हैं पाणी हूं,

म्हैं अठै पैली आयौ हो।

उणरी हरी जुराबां रै ऊपर।

स्रोत
  • पोथी : अपरंच अक्टूबर-दिंसबर 2015 ,
  • सिरजक : पॉल इवान्स ,
  • संपादक : पारस अरोड़ा ,
  • प्रकाशक : अपरंच प्रकासण
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