पाणी पर कवितावां

पानी या जल जीवन के अस्तित्व

से जुड़ा द्रव है। यह पाँच मूल तत्त्वों में से एक है। प्रस्तुत चयन में संकलित कविताओं में जल के विभिन्न भावों की प्रमुखता से अभिव्यक्ति हुई है।

कविता102

पाणी री पीड़

सुरेश कुमार डूडी

आभै रै कळसै रो पाणी

रेवंत दान बारहठ

सोवन माछळी

सत्यप्रकाश जोशी

दौरो घणो जीणो

कृष्णा आचार्य

काळ

किशन ‘प्रणय’

तिस सूं नीं मरै’ला

नवनीत पाण्डे

बे बिम्ब

आभा मेहता 'उर्मिल'

बात बीतगी

राजूराम बिजारणियां

पणिहारी

श्याम सुन्दर टेलर

म्हारी कविता

लक्ष्मीनारायण रंगा

आषाढी बिरखा

नंदू राजस्थानी

जिनगाणी एक चितराम

रामेश्वर दयाल श्रीमाली

अै सवाल

ओंकार श्री

तिराक

मणि मधुकर

हवा आग अर पाणी

ज़ेबा रशीद

तिरसो कागलो

मंगत बादल

रेत

प्रेमलता सोनी

आँक न पाणी

शैलेन्द्र उपाध्याय

हेलो पाड़ रे

हरीश भादानी

पाणी

अम्बिका दत्त

पिणघट

शारदा कृष्ण

कम्पोज

वासुदेव चतुर्वेदी

नहर री मुळक

मदन गोपाल लढ़ा

जुलमी जळ

रतन ‘राहगीर’

पांणत

रेवतदान चारण कल्पित

मेह अंधारी रात

नंद भारद्वाज

जीवण

बी. आर. प्रजापति

दुनिया नौ मोटौ आदमी

भविष्यदत्त ‘भविष्य’

घर

अम्बिका दत्त

पांणी सूं हेत

नंद भारद्वाज

भूखमोचिनी

मदन गोपाल लढ़ा

आपांरै बिचाळै

चन्द्र प्रकाश देवल

पिणघट

नाथूसिंह इंदा

पाणी

जितेन्द्र कुमार सोनी

कविता अर म्हैं

विजयसिंह नाहटा

पळींडौ

गौरीशंकर निमिवाळ

उन्हाळो

भेरूसिंह राव क्रांति

म्हैं थार रौ कवि

चन्द्र प्रकाश देवल

जळ में

राजेश कुमार व्यास

पाणी री मार

ओमप्रकाश गर्ग 'मधुप'

मिनख वास्ते

सांवर दइया

रेगिस्तान होग्यो

हरिचरण अहरवाल 'निर्दोष'

जळ

मोहन आलोक