सबद चिरकली
रंग रंगीली
कदै मन री गुफा में
बैठ’र होळै-होळै
मुळकै
किणनै ई नीं दीखै
पण वा सगळा नै देखै
जबरी छळी।
सबद चिरकली
कदै ई होठां तांई
आय’र पाछी आपरै
ठाणैं परी जावै
लोग उणरा अैनाण सोधै
पण कीं रै ई कीं
हाथ नीं आवै।
सबद चिरकली
कदै ई फुदक’र
साम्है बैठै मिनख रै
अंतस मांय जा बड़ै
वो इण सूं सोरो व्है
कै दोरो
इणरो हिसाब
नी राखै चिरकली।
सबद चिरकली
कदैई कठैई
चूंच मारणो सरू करै
तो मारती ई रैवै
ढाब्यां नीं ढबै
हाथी जितरो बळ
अर मिनख जिस्यो छळ।
इण चिरकली नै
पकड़वा सारू
घणखरा लोग
जाळ बिछावै
दाणां दिखावै
हाथ जोड़ै
विणती करै
पण आ मिजाजण
टस सूं मस नीं हुवै।
अर जिणरै पल्लै
आणों धारै
तो पल में आ जावै
घणी मनमौजी
ऊंडी समझ री खोजी
मन से बिछावणो
हेरती फिरै
बिना सळवालौ
अर जठै निरसळ
चादर देखै
वठै ई पसर जावै।